मनमोहन सिंह के निधन पर कांग्रेस कार्य समिति ने उनके योगदान की सराहना करते हुए शोक प्रस्ताव किया पारित

डॉ. मनमोहन सिंह, जो कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य भी रहे, उनके लिए पार्टी ने एक शोक प्रस्ताव पारित करते हुए उनके योगदान को याद रखने और उनके विचारों को आगे बढ़ाने का वादा किया है।

Vyom Tiwari
Published on: 28 Dec 2024 8:31 AM IST
मनमोहन सिंह के निधन पर कांग्रेस कार्य समिति ने उनके योगदान की सराहना करते हुए शोक प्रस्ताव किया पारित
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manmohan singh death: पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह के निधन पर कांग्रेस कार्य समिति ने शनिवार को गहरी संवेदना व्यक्त की और एक शोक प्रस्ताव पारित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। समिति ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि वे देश के आर्थिक उदारीकरण के शिल्पकार थे। डॉ. मनमोहन सिंह ने अपनी दूरदर्शी सोच से देश को आर्थिक संकट से बाहर निकाला और आर्थिक सुधारों की शुरुआत की। उनके नेतृत्व में भारत ने वैश्विक बाजार के लिए अपने दरवाजे खोले, जिससे देश आज एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में उभरकर दुनिया के सामने खड़ा है।

उनके योगदान को किया याद 

कार्यसमिति ने डॉ. सिंह की यादों और उनके योगदान को संजोने का संकल्प लिया। समिति ने कहा कि आर्थिक सुधार, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास में उनका काम हमें हमेशा प्रेरित करेगा। उन्होंने ईमानदारी, मेहनत और सहानुभूति के जो आदर्श स्थापित किए, वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे। डॉ. सिंह का नेतृत्व और अर्थशास्त्र में उनकी भूमिका हमेशा याद की जाएगी। डॉक्टर मनमोहन सिंह कांग्रेस कार्यसमिति के लंबे समय तक सदस्य रहे। कार्यसमिति ने उनके सम्मान में कहा कि बतौर 13वें प्रधानमंत्री, उन्होंने देश का नेतृत्व शांति, दृढ़ संकल्प और गहरी समझदारी के साथ किया। उनके कार्यकाल में देश ने लगातार आर्थिक विकास, वैश्विक पहचान और सामाजिक प्रगति हासिल की।

सम्मानित शिक्षाविद् भी थे मनमोहान सिंह 

2008 के वैश्विक आर्थिक संकट के समय, उन्होंने देश को इस संकट से बचाने के लिए अहम कदम उठाए। उनकी रणनीतियों की वजह से देश इस कठिन समय से सुरक्षित बाहर निकल सका। उनके नेतृत्व में देश को मजबूत बनाने के लिए कई बड़े फैसले किए गए, जैसे मनरेगा, शिक्षा का अधिकार, भारत-अमेरिका सिविल न्यूक्लियर डील, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून और सूचना का अधिकार। इन सभी ने समाज पर गहरा और सकारात्मक प्रभाव डाला। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि वे केवल एक राजनेता या प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि एक सम्मानित शिक्षाविद् भी थे। उनकी गहरी आर्थिक समझ और शिक्षा के प्रति उनका समर्पण न सिर्फ छात्रों और विद्वानों बल्कि नीति निर्माताओं को भी प्रेरित करता रहा। समिति ने उनकी सादगी और शालीनता को याद करते हुए कहा कि उनका स्वभाव हमेशा शांत, संतुलित और ईमानदार रहा। उन्होंने यह भी दिखाया कि गरिमा और विनम्रता कैसे किसी ऊंचे पद पर बैठे व्यक्ति के व्यक्तित्व का अहम हिस्सा बन सकती हैं। वे इसके बेहतरीन उदाहरण थे। यह भी पढ़े:
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