कनाडा ने अपने SDS छात्र वीजा स्कीम को किया बंद, जानें भारतीयों पर इसका क्या पड़ेगा प्रभाव?

कनाडा सरकार ने बीते शुक्रवार को इंटरनेशनल छात्रों के लिए अपने स्टूडेंट डायरेक्ट स्ट्रीम (SDS) वीजा कार्यक्रम को बंद कर दिया है। कनाडा (canada) ने इसे आवासीय और संसाधन संकट से निपटने के लिए उठाया गया कदम बताया है।

Shiwani Singh
Published on: 9 Nov 2024 7:36 PM IST
कनाडा ने अपने SDS छात्र वीजा स्कीम को किया बंद, जानें भारतीयों पर इसका क्या पड़ेगा प्रभाव?
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भारत कनाडा के बीच जारी तनाव के बीच ट्रूडो सरकार ने बीते शुक्रवार को इंटरनेशनल छात्रों के लिए अपने स्टूडेंट डायरेक्ट स्ट्रीम (SDS) वीजा कार्यक्रम को बंद करने का ऐलान किया है।  कनाडा (canada) ने अपने इस फैसले को आवासीय और संसाधन संकट से निपटने के लिए उठाया गया कदम बताया है।

भारत समेत 14 देशों के आवेदकों को रोका

कनाडा के इस कदम ने भारत, पाकिस्तान और फिलीपींस सहित 14 देशों के आवेदकों को अपने यहां आने से रोक दिया है। बता दें कि इससे पहले SDS के तहत आवेदक तेज प्रोसेसिंग और जल्दी एंट्री मिलने का लाभ उठा रहे थे। बता दें कि यह कार्यक्रम 2018 में इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज़ और सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) द्वारा 14 देशों के अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए स्टडी परमिट आवेदन प्रक्रिया को तेज बनाने के लिए शुरू किया गया था। जिनमें ब्राज़ील, चीन, कोलंबिया, कोस्टा रिका, भारत, मोरक्को, पाकिस्तान, पेरू, फिलीपींस और वियतनाम शामिल थे।

SDS बंद करने पर क्या कहा कनाडा ने

इसे बंद करते हुए कनाडा सरकार ने अपनी वेबसाइट पर कहा कि यह पहल कार्यक्रम की सत्यनिष्ठा को मजबूत करने, छात्रों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए, सभी छात्रों को आवेदन प्रक्रिया तक समान और निष्पक्ष पहुंच देने के लिए बंद की जा रही है। justin trudeau यह भी बताया गया कि 8 नवंबर को अपराह्न 2 बजे (ET) तक प्राप्त किए गए आवेदन प्रक्रिया में शामिल किए जाएंगे। जबकि इसके बाद के सभी आवेदन सामान्य स्टडी परमिट स्ट्रीम के तहत प्रोसेस किए जाएंगे।

भारत समेत अन्य देशों के छात्रों पर कैसा असर पडे़गा

इस कार्यक्रम के तहत आवेदन करने वाले छात्रों को उच्च स्वीकृति दरें और तेज प्रोसेसिंग की सुविधा मिलकी थी। कार्यक्रम के बंद होने से भारत और 13 अन्य देशों के छात्रों को वीज़ा प्रक्रिया में अधिक समय लगेगा।

कनाडा का ये फैसला नाटकीय नीति बदलाव

बता दें कि कनाडा इतने सालों बाद पहली बार अपने देश में प्रवेश करने वाले बाहरी छात्रों की संख्या को कम करने की योजना बना रहा है, जो एक नाटकीय नीति बदलाव की तरह प्रतीत हो रहा है। कनाडा लंबे समय से उसके देश में आने वाले नए लोगों का स्वागत करता था। लेकिन अब वह प्रवासियों के बारे में बात कर रहा है, जिन्हें आवास संकट, बढ़ती जीवनयापन की लागत और दबाव में पड़े स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली से जोड़कर देखा जा रहा है।
बता दें कि यह मुद्दा कनाडाई राजनीति में सबसे विवादास्पद विषयों में से एक बन गया है, क्योंकि 2025 अक्टूबर तक एक संघीय चुनाव होना है। पोल्स दिखाते हैं कि जनसंख्या का एक बढ़ता हुआ हिस्सा मानता है कि कनाडा में बहुत अधिक आव्रजन हो रहा है। ये भी पढ़ेंः ट्रूडो ने स्वीकारा कनाडा में मौजूद हैं खालिस्तानी, कहा- 'सभी हिंदू मोदी समर्थक नहीं हैं'
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