भारतीय सेना का नया हथियार, नागास्त्र-1 सुसाइड ड्रोन से दुश्मन के घर में घुसकर होगा हमला

सर्जिकल स्ट्राइक के लिए अब फाइटर जेट की जरूरत नहीं, स्वदेशी तकनीक से बना नागास्त्र-1 ड्रोन करेगा दुश्मन को चारों खाने चित

Vyom Tiwari
Published on: 4 Dec 2024 9:56 AM IST
भारतीय सेना का नया हथियार, नागास्त्र-1 सुसाइड ड्रोन से दुश्मन के घर में घुसकर होगा हमला
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Nagastra-1: भारतीय सेना के शस्त्रागार में एक नया और अत्याधुनिक हथियार शामिल होने जा रहा है। यह हथियार है नागास्त्र-1, एक स्वदेशी सुसाइड ड्रोन जो दुश्मन के ठिकानों पर चुपके से हमला करने में सक्षम है। इस ड्रोन के आने से भारत की सैन्य क्षमता में बड़ा इजाफा होगा और यह इजरायली शैली में एयर स्ट्राइक करने में मदद करेगा। आइए जानते हैं इस नए हथियार के बारे में विस्तार से।

नागास्त्र-1: भारत का स्वदेशी सुसाइड ड्रोन

नागास्त्र-1 (Nagastra-1) एक स्वदेशी सुसाइड ड्रोन है, जिसे भारतीय कंपनी सोलार इंडस्ट्रीज की सहायक कंपनियों इकोनॉमिक्स एक्सप्लोसिव लिमिटेड और जेड मोशन ऑटोनॉमस सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड ने विकसित किया है। यह ड्रोन लॉयटरिंग म्यूनिशन की श्रेणी में आता है, जिसे सामान्य भाषा में सुसाइड ड्रोन (Kamakazi Drone) कहा जाता है। नागास्त्र-1 के दो वैरिएंट हैं, जो 60 से 90 मिनट तक उड़ान भर सकते हैं। इसकी ऑपरेशनल रेंज 15 किलोमीटर है। यह ड्रोन 4500 मीटर की ऊंचाई तक उड़ सकता है और दुश्मन के टैंक, बंकर, बख्तरबंद वाहनों, हथियार डिपो या सैन्य समूहों पर सटीक हमला कर सकता है।
Nagastra-1

नागास्त्र-1 की विशेषताएं और क्षमताएं

नागास्त्र-1 के दोनों वैरिएंट अपनी-अपनी खास विशेषताओं से लैस हैं: • पहला वैरिएंट: - वजन: 6 किलोग्राम - उड़ान समय: 60 मिनट - वीडियो लिंक रेंज: 15 किलोमीटर - जीपीएस टारगेट रेंज: 45 किलोमीटर - वॉरहेड क्षमता: 1 किलोग्राम - विस्फोट क्षमता: 20 मीटर का इलाका •दूसरा वैरिएंट: - वजन: 11 किलोग्राम - उड़ान समय: 90 मिनट - वीडियो लिंक रेंज: 25 किलोमीटर - जीपीएस टारगेट रेंज: 60 किलोमीटर - वॉरहेड क्षमता: 4 किलोग्राम दोनों वैरिएंट रीयल टाइम वीडियो बना सकते हैं और दिन-रात दोनों समय काम करने में सक्षम हैं। इनमें ड्यूल सेंसर लगे हैं जो इन्हें हर परिस्थिति में कारगर बनाते हैं।
Nagastra-1

भारतीय सेना के लिए नागास्त्र-1 का महत्व

नागास्त्र-1 का भारतीय सेना में शामिल होना कई मायनों में महत्वपूर्ण है: • स्वदेशी तकनीक: यह पूरी तरह से भारत में विकसित किया गया है, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है। • लागत प्रभावी: यह इजरायल और पोलैंड से आयात किए जाने वाले हवाई हथियारों से लगभग 40 प्रतिशत सस्ता है। • सटीक हमले की क्षमता: इसकी सटीक निशाना लगाने की क्षमता इसे एक प्रभावी हथियार बनाती है। •
बहुउद्देशीय:
यह ड्रोन निगरानी से लेकर हमले तक विभिन्न कार्यों में सक्षम है। • सर्जिकल स्ट्राइक में सहायक: भविष्य में यह फाइटर जेट की जगह ले सकता है, जिससे सर्जिकल स्ट्राइक और भी प्रभावी हो सकती हैं।

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