मेहुल चोकसी कब आएगा भारत? बेल्जियम में पैरवी के लिए रखे ये दो महेंगें और नामी वकील

हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी बेल्जियम में गिरफ्तार हुआ। भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ यूरोप के मशहूर वकील केस लड़ेंगे। सेहत पर भी सवाल उठाए।

Vyom Tiwari
Published on: 15 April 2025 11:55 AM IST
मेहुल चोकसी कब आएगा भारत? बेल्जियम में पैरवी के लिए रखे ये दो महेंगें और नामी वकील
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हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी, जो पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले में करीब 13,000 करोड़ रुपये का आरोपी है, अब बेल्जियम में गिरफ्तार हो गया है। ये गिरफ्तारी 12 अप्रैल को हुई, भारत की जांच एजेंसियों की अपील पर बेल्जियम की पुलिस ने उसे पकड़ा। मेहुल चोकसी 65 साल का है और नवंबर 2023 में इलाज के बहाने बेल्जियम गया था। तब से वो वहीं रह रहा था। इससे पहले, चोकसी 2018 में भारत छोड़कर कैरेबियाई देश एंटीगुआ चला गया था। कहा जाता है कि भारत की नागरिकता होते हुए भी उसने एंटीगुआ की नागरिकता ले ली थी।

चोकसी की पैरवी करेंगे यूरोप के ये नामी वकील 

मेहुल चोकसी ने अब अपनी गिरफ्तारी और भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने यूरोप के नामी और महंगे वकीलों में गिने जाने वाले पॉल बिकायथ और उनके बेटे साइमन बिकायथ को अपने केस की पैरवी के लिए चुना है। ये पिता-पुत्र की जोड़ी यूरोप के कई बड़े मानवाधिकार और प्रत्यर्पण मामलों में पहले भी वकालत कर चुकी है। साइमन बिकायथ ने साफ कहा है कि वे इस प्रत्यर्पण के फैसले को कोर्ट में चुनौती देंगे। उन्होंने कहा, “ये कहने की जरूरत नहीं कि हम भारत प्रत्यर्पण को चैलेंज करने जा रहे हैं। हम भारत की स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठाएंगे।” साइमन ने बताया कि वे आने वाले दिनों में इसकी कानूनी प्रक्रिया शुरू करेंगे। उनका दावा है कि चोकसी को भारत में निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिल पाएगी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पहले एंटीगुआ में जो घटनाएं हुईं, वे बहुत कुछ बयां करती हैं। इंटरपोल ने चोकसी के खिलाफ रेड नोटिस वापस लिया था और वो कोई सामान्य बात नहीं थी। इसके अलावा, वकीलों ने चोकसी की सेहत का भी हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि चोकसी ब्लड कैंसर के मरीज हैं और उनकी ये स्थिति भारत प्रत्यर्पण को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

कौन हैं पॉल और साइमन बिकायथ?

पॉल बिकायथ ने 1967 से 1972 के बीच कानून की पढ़ाई की थी। आज वो बेल्जियम के जाने-माने वकील माने जाते हैं। खासकर उन्हें मानवाधिकारों के वकील के तौर पर पहचान मिली है। उनके पिता एक कंपनी में क्रय निदेशक थे, लेकिन बिकायथ ने उनके रास्ते पर न जाकर अपना अलग करियर चुना। बिकायथ बताते हैं कि उनके माता-पिता राजनीति से काफी घबराते थे, लेकिन वो खुद ऐसा नहीं मानते। उनका कहना है कि वे किसी भी राजनीतिक पार्टी के सदस्य नहीं हैं। उनका पेशा ऐसे लोगों के लिए बिल्कुल सही है जो किसी तय ढांचे में बंधकर नहीं रहना चाहते। एक वकील के तौर पर उनका काम ऐसे लोगों के बीच संवाद बनाना है जो समाज और सिस्टम से खुद को अलग रखते हैं।

बड़े पदों पर कर चुके हैं काम

पॉल 1975 से मानवाधिकार लीग से जुड़े हुए हैं। सितंबर 2007 से अगस्त 2009 तक उन्होंने ब्रुगेस बार के अध्यक्ष के रूप में काम किया। इसके अलावा वे ब्रुगेस बार की काउंसिल और फ्लेमिश बार की जनरल असेंबली के भी सदस्य रहे हैं। पॉल करीब 20 साल तक उप-न्यायाधीश रहे और हेग में स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में वकील भी रहे। उन्होंने एक किताब भी लिखी है जिसका नाम है The Creeping Coup d’État – Plea of a Romantic Lawyer। पॉल के बेटे, साइमन बिकायथ भी वकील हैं, जैसे उनके पिता। साइमन का जन्म 12 अक्टूबर 1977 को बेल्जियम के टिल्ट में हुआ था। उन्होंने 2000 में कानून की पढ़ाई पूरी की। 2001 में, जब बेल्जियम ने यूरोपीय संघ की अध्यक्षता की थी, उस दौरान साइमन बेल्जियम के विदेश मंत्रालय में संपर्क अधिकारी के रूप में कार्यरत थे। साल 2007 से वे वकील के तौर पर सक्रिय हैं। साइमन खासतौर पर मानव तस्करी, जबरन वेश्यावृत्ति और शोषण जैसे गंभीर मामलों में काम करते हैं और पीड़ितों की ओर से वकालत करते हैं।

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