शहीद दिवस 2025: भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की शहादत का दिन, जानिए इनके गौरवशाली इतिहास के बारे में

23 मार्च का दिन भारत में शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है।यह दिन देश के उन वीर सपूतों को याद करने का दिन है

Jyoti Patel
Published on: 23 March 2025 8:54 AM IST
शहीद दिवस 2025: भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की शहादत का दिन, जानिए इनके गौरवशाली इतिहास के बारे में
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शहीद दिवस 2025: 23 मार्च का दिन भारत में शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है।यह दिन देश के उन वीर सपूतों को याद करने का दिन है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। इस दिन, हम विशेष रूप से भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु को श्रद्धांजलि देते हैं। आपको बता दें, 23 मार्च 1931 को, ब्रिटिश सरकार ने भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दी थी। जिसके बाद से हर साल यह दिन शईद दिवस के नाम से मनाये जाने लगा। इन तीनों क्रांतिकारियों ने भारत की आजादी के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया, इनके बलिदान ने स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई ऊर्जा प्रदान की और देशवासियों को प्रेरित किया। यह दिन हमें याद दिलाता है कि आजादी का मूल्य कितना महान है और हमें अपने देश के प्रति वफादार रहने के लिए प्रेरित करता है।

क्या है शहीद दिवस का इतिहास ?

1928 में, साइमन कमीशन भारत आया, जिसमें कोई भारतीय सदस्य नहीं था। इससे देश भर में विरोध प्रदर्शन हुए। लाला लाजपत राय ने इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। जिसके बाद ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जेम्स ए स्कॉट ने लाठीचार्ज का आदेश दिया, जिसमें लाला लाजपत राय गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद 17 नवंबर 1928 को, लाठीचार्ज के कारण लगी चोटों के कारण लाला लाजपत राय का निधन हो गया। उनकी मौत से भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने जेम्स ए स्कॉट से बदला लेने का फैसला किया। 17 दिसंबर को, भगत सिंह और उनके साथियों ने जेम्स स्कॉट की जगह पुलिस अधिकारी सॉन्डर्स की हत्या कर दी। सॉन्डर्स हत्याकांड में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को दोषी ठहराया गया और 23 मार्च 1931 को उन्हें लाहौर जेल में फांसी दे दी गई।

शहीद दिवस पर इन संदेशो के साथ याद करें देश के वीरों को

आओ झुककर सलाम करें उन शहीदों को, जिनकी हिम्मत से यह वतन आबाद है, वे मिट गए तो नाम रोशन हुआ, उनके होने से ही यह देश आजाद है. जो शहीद हुए हैं उनका अरमान जिंदा है, जब तक रहेगा भारत, उनका नाम जिंदा है. वो फांसी पर झूल गए ताकि हम सिर उठाकर जी सकें, उनका बलिदान व्यर्थ न जाने दें. ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी. ये भी पढ़ें: अनंतनाग में लश्कर हैंडलर की अवैध संपत्ति ध्वस्त! देखें कैसे आतंक के गढ़ को मिटा रही है सरकार!
Jyoti Patel

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