'दुनिया बैलेट की ओर हम EVM पर ही अड़े...',कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में ऐसे गरजे खरगे; जानें खास बातें

गुजरात अधिवेशन में मल्लिकार्जुन खरगे ने EVM पर सवाल उठाया, केंद्र पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया, सियासी संकेत भी दिए।

Rohit Agrawal
Published on: 9 April 2025 3:46 PM IST
दुनिया बैलेट की ओर हम EVM पर ही अड़े...,कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में ऐसे गरजे खरगे; जानें खास बातें
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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुजरात के दो दिवसीय अधिवेशन में एक बार फिर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर सवाल उठाकर केंद्र की मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा किया। अहमदाबाद में साबरमती नदी के किनारे चल रहे इस अधिवेशन में खरगे ने तीखे तेवर दिखाते हुए कहा कि जब पूरी दुनिया बैलेट पेपर की ओर लौट रही है, तब भारत EVM पर अड़ा हुआ है। उन्होंने BJP पर चुनावी फायदे के लिए EVM का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और विपक्ष की आवाज दबाने की सरकार की नीति पर भी जमकर निशाना साधा। आइए, उनके बयानों की खास बातों को रोचक अंदाज में समझते हैं।

EVM का "फ्रॉड": दुनिया आगे, हम पीछे?

खरगे ने अधिवेशन में भरी सभा में कहा कि दुनिया के तमाम विकसित देश EVM को अलविदा कहकर बैलेट पेपर की ओर बढ़ रहे हैं और हम हैं कि EVM को गले लगाए बैठे हैं।" उनका इशारा साफ था कि EVM की पारदर्शिता पर सवाल तो हमेशा से उठते रहे हैं, लेकिन सरकार इस पर आंखें मूंदे हुए है। उन्होंने दावा किया कि BJP ने EVM के जरिए ऐसे "तरीके ईजाद" किए हैं, जो सिर्फ सत्ताधारी पार्टी को फायदा पहुंचाते हैं। खरगे ने चेतावनी दी, "यह सब फ्रॉड है। आने वाले दिनों में देश के नौजवान उठ खड़े होंगे और कहेंगे कि हमें EVM नहीं चाहिए।" यह बयान न सिर्फ सरकार पर हमला था, बल्कि युवाओं को एकजुट होने का आह्वान भी था।

"अभिव्यक्ति की आजादी पर लगा दिया है पहरा"

खरगे ने सरकार पर विपक्ष को दबाने का इल्जाम लगाते हुए कहा कि 11 साल से सत्ता में बैठी यह सरकार विपक्ष को बोलने तक का मौका नहीं देती। उन्होंने लोकसभा का जिक्र करते हुए बताया कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को भी अपनी बात रखने से रोका जाता है। जब राहुल गांधी जैसे नेता को बोलने नहीं दिया जाता, तो सोचिए आम जनता की आवाज का क्या हाल होगा? खरगे का यह सवाल सीधे सरकार की मंशा पर हमला था। उन्होंने आगे कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी पर पहरा लगा है। यह मानसिकता देश के लिए ठीक नहीं।" यहाँ खरगे ने सरकार को "तानाशाही" की राह पर चलने वाला करार दे डाला।

"गुजरात में अधिवेशन हमारी जड़ों से जुड़ा मसला"

खरगे ने गुजरात में अधिवेशन के पीछे की वजह भी साफ की। उन्होंने कहा कि "यह कोई सियासी ड्रामा नहीं, बल्कि हमारी जड़ों से जुड़ा मसला है।" कांग्रेस के 140 साल के इतिहास में 86 अधिवेशन हुए, जिनमें से 6 गुजरात में हुए। अहमदाबाद को "तीर्थ स्थल" बताते हुए उन्होंने साबरमती आश्रम और सरदार पटेल स्मारक का जिक्र किया। "यह अधिवेशन गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने की शताब्दी और पटेल की 150वीं जयंती को समर्पित है।" खरगे ने गुजरात की तीन महान हस्तियों दादाभाई नौरोजी, गांधी और पटेल का हवाला देकर बताया कि कैसे इस धरती ने कांग्रेस को मजबूत किया। "यहाँ से निकला दांडी मार्च अंग्रेजों को हिला गया था—यह प्रेरणा भूमि है।"

"संस्थानों को बेच रहे, लोकतंत्र को खत्म कर रहे"

खरगे ने सिर्फ EVM पर ही नहीं रुके। उन्होंने मोदी सरकार पर पिछले 11 सालों में लोकतंत्र को "धीरे-धीरे खत्म" करने का इल्जाम लगाया। "संवैधानिक संस्थानों पर हमला हो रहा है। हवाई अड्डे, बंदरगाह, खदानें सब कुछ कुछ उद्योगपतियों को बेच दिया जा रहा है।" खरगे का यह हमला BJP की "अमीरों की सरकार" वाली छवि को निशाना बनाता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस सरकार में चुनावी धोखाधड़ी हो रही है। विकसित देश बैलेट पर लौट गए, पर हम EVM से चिपके हैं। यह तकनीक विपक्ष को हराने के लिए बनाई गई है।" खरगे ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से इस "लड़ाई" में एकजुट होने की अपील की।

तो क्या है कहानी का सार?

मल्लिकार्जुन खरगे का यह भाषण सिर्फ EVM की आलोचना नहीं था, बल्कि सरकार के खिलाफ एक बड़ा सियासी हमला था। गुजरात में हुए इस अधिवेशन को उन्होंने गांधी और पटेल की विरासत से जोड़कर भावनात्मक अपील भी दी। सोनिया गांधी और राहुल गांधी की मौजूदगी ने इस आयोजन को और वजन दिया, हालाँकि प्रियंका गांधी की गैरमौजूदगी ने सवाल खड़े किए। खरगे का संदेश साफ था कि EVM पर सवाल उठाकर और विपक्ष की दबी आवाज को बुलंद करके वह कांग्रेस को नया जोश देना चाहते हैं। अब देखना यह है कि क्या यह "बैलेट पेपर" का नारा सचमुच युवाओं को सड़कों पर लाएगा, या यह सिर्फ सियासी बयानबाजी बनकर रह जाएगा!
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