Powerlifter Death: 270Kg वजन उठाते समय पॉवरलिफ्टर की हुई मौत, जानें क्यों नहीं उठाना चाहिए क्षमता से अधिक वजन

Powerlifter Death: राजस्थान के बीकानेर में बुधवार को एक भीषण हादसे में जूनियर नेशनल गेम के स्वर्ण पदक विजेता पावरलिफ्टर की मौत हो गई।

Preeti Mishra
Published on: 20 Feb 2025 3:21 PM IST
Powerlifter Death: 270Kg वजन उठाते समय पॉवरलिफ्टर की हुई मौत, जानें क्यों नहीं उठाना चाहिए क्षमता से अधिक वजन
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Powerlifter Death: राजस्थान के बीकानेर में बुधवार को एक भीषण हादसे में जूनियर नेशनल गेम के स्वर्ण पदक विजेता पावरलिफ्टर की मौत हो गई। रिपोर्ट के अनुसार, यष्टिका आचार्य, जो केवल 17 साल की थी, की जिम में 270 किलो की रॉड गिरने से गर्दन टूटने से मौत (Powerlifter Death) हो गई। पुलिस के मुताबिक, हादसा उस वक्त हुआ जब ट्रेनर यष्टिका (Junior National Game gold medallist Yashtika Acharya) को जिम में वजन उठवा रहा था। हादसे के दौरान ट्रेनर को भी मामूली चोटें आईं। घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। यष्टिका (Powerlifter Death) ने पिछले साल गोवा में नेशनल बेंच प्रेस चैंपियनशिप में सब-जूनियर 84 किग्रा और उससे अधिक वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था।

क्या है पावरलिफ्टिंग?

पावरलिफ्टिंग (Powerlifting Game) एक ताकत वाला खेल है, जिसमें तीन लिफ्टों पर अधिकतम वजन उठाने के तीन प्रयास- स्क्वाट, बेंच प्रेस और डेडलिफ्ट- शामिल होते हैं। ओलंपिक भारोत्तोलन में, एथलीट वेट प्लेटों से भरे बारबेल के अधिकतम वजन को एकल-लिफ्ट करने का प्रयास करते हैं। पावरलिफ्टर्स तीन प्रतिस्पर्धी लिफ्टों में अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए वजन प्रशिक्षण का अभ्यास करते हैं। इसके अलावा पावरलिफ्टिंग में उपयोग की जाने वाली वजन प्रशिक्षण दिनचर्या भी विविध हैं। कई पावरलिफ्टिंग दिनचर्या में खेल विज्ञान के सिद्धांतों का भी आह्वान किया जाता है, लेकिन ऐसी प्रशिक्षण विधियों की वैज्ञानिक नींव पर विवाद है। प्रशिक्षण बॉडीबिल्डिंग और वेटलिफ्टिंग से भी अलग है, इसमें बॉडी बिल्डिंग की तुलना में वॉल्यूम और हाइपरट्रॉफी पर कम ध्यान दिया जाता है, और वेटलिफ्टिंग की तुलना में पावर उत्पादन पर भी कम ध्यान दिया जाता है।

पॉवेरलिफ्टर्स को वजन उठाते समय इन बातों का रखना चाहिए ध्यान

यहां सात महत्वपूर्ण बातें हैं जिनका पावरलिफ्टर्स को वजन उठाते समय ध्यान रखना चाहिए: उचित वार्म-अप - ब्लड फ्लो को बढ़ाने, मांसपेशियों को ढीला करने और चोटों को रोकने के लिए हमेशा पूरी तरह से वार्म-अप से शुरुआत करें। भारी वजन उठाने से पहले गतिशील स्ट्रेचिंग और लाइट सेट महत्वपूर्ण हैं। सही रूप और तकनीक - जोड़ों और मांसपेशियों पर तनाव से बचने के लिए स्क्वाट, डेडलिफ्ट और बेंच प्रेस में उचित मुद्रा और तकनीक बनाए रखें। तटस्थ रीढ़, नियंत्रित गति और स्थिर आधार पर ध्यान केंद्रित करें।
क्रमिक प्रगति -
अचानक ज्यादा वजन उठाने के बजाय धीरे-धीरे वजन बढ़ाएं। बहुत तेजी से ओवरलोडिंग करने से चोट लग सकती है और मांसपेशियों में थकान हो सकती है। श्वास नियंत्रण - कोर को स्थिर करने और भारी लिफ्टों के दौरान अधिकतम शक्ति उत्पन्न करने के लिए वलसाल्वा पैंतरेबाज़ी जैसी उचित श्वास तकनीक का उपयोग करें। पकड़ की मजबूती और सुरक्षा - बारबेल पर मजबूत पकड़ सुनिश्चित करें और यदि आवश्यक हो तो चॉक, पट्टियाँ, या उठाने वाले बेल्ट का उपयोग करें। इसके अलावा, भारी लिफ्टों के दौरान हमेशा सुरक्षा बार या स्पॉटर का उपयोग करें।
आराम और रिकवरी -
सेट और प्रशिक्षण सत्र के बीच मांसपेशियों को पर्याप्त आराम दें। अत्यधिक प्रशिक्षण से थकान, ताकत कम होना और चोटें लग सकती हैं। उचित नींद, हाइड्रेशन और पोषण आवश्यक है। अपने शरीर की सुनें - दर्द या परेशानी को कभी भी नज़रअंदाज न करें। अगर कुछ अजीब लगे तो वजन कम करें या तुरंत बंद कर दें। यह भी पढ़ें: Prunes for Constipation: कब्ज से हैं पीड़ित तो खाइए आलूबुखारा, ये किसी सुपरफूड से नहीं है कम
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Senior Sub Editor (Feature)

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