Jitiya Thread 2025: महिलाएं क्यों पहनती हैं जिउतिया धागा? जानें इसका धार्मिक महत्व

इस व्रत का एक सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक जितिया धागा है, जिसे महिलाएं अनुष्ठान पूरा करने के बाद अपने गले में पहनती हैं।

Preeti Mishra
Published on: 11 Sept 2025 7:00 AM IST
Jitiya Thread 2025: महिलाएं क्यों पहनती हैं जिउतिया धागा? जानें इसका धार्मिक महत्व
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Jitiya Thread 2025: जीवित्पुत्रिका व्रत, जिसे जितिया व्रत भी कहा जाता है, बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश और नेपाल में माताओं द्वारा मनाया जाने वाला एक अत्यंत पूजनीय त्योहार है। इस वर्ष यह व्रत 14 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन (Jitiya Thread 2025) महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए निर्जल व्रत रखती हैं। इस व्रत का एक सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक जितिया धागा (Jitiya Thread 2025) है, जिसे महिलाएं अनुष्ठान पूरा करने के बाद अपने गले में पहनती हैं। यह धागा केवल एक डोरी नहीं है, बल्कि सुरक्षा, भक्ति और मातृत्व का एक शक्तिशाली आध्यात्मिक प्रतीक है।

जितिया धागा क्या है?

जितिया धागा एक पवित्र, रंगीन धागा है जिसे महिलाएं भगवान जीमूतवाहन की पूजा के बाद बाँधती हैं, जिनकी पूजा जीवित्पुत्रिका व्रत के दौरान की जाती है। यह धागा आमतौर पर लाल और पीले रंगों से बना होता है, जिनमें से प्रत्येक जीवन और सुरक्षा की विशिष्ट ऊर्जाओं का प्रतिनिधित्व करता है। जहां लाल रंग शक्ति, भक्ति और मातृत्व की सुरक्षात्मक शक्ति का प्रतीक है वहीं पीला रंग पवित्रता, समृद्धि और देवताओं के आशीर्वाद का प्रतीक है। यह धागा माताओं द्वारा पूरे वर्ष बच्चों के लिए एक सुरक्षात्मक ताबीज के रूप में पहना जाता है, जो उनकी भलाई सुनिश्चित करता है और उन्हें असामयिक खतरों से बचाता है।

Jitiya Thread 2025: महिलाएं क्यों पहनती हैं जिउतिया धागा? जानें इसका धार्मिक महत्व

जितिया धागे का धार्मिक महत्व

एक बालक को गरुड़ की बलि चढ़ने से बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले जीमूतवाहन की कथा जीवित्पुत्रिका व्रत का आधार है। स्त्रियाँ अपने बच्चों के लिए भी इसी प्रकार की सुरक्षा और साहस की कामना करते हुए पूरी श्रद्धा से यह व्रत रखती हैं। जितिया धागा बाँधना इसी रक्षा-व्रत का प्रतीक है। जिस प्रकार जीमूतवाहन ने एक बच्चे की रक्षा की थी, उसी प्रकार माताएँ यह धागा पहनकर यह दिव्य आश्वासन प्राप्त करती हैं कि उनके अपने बच्चे सदैव सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध रहेंगे। ऐसा माना जाता है कि: यह धागा भगवान जीमूतवाहन का आशीर्वाद लिए होता है। यह बीमारियों और दुर्भाग्य के विरुद्ध एक आध्यात्मिक कवच का काम करता है। यह माँ और उसके बच्चे के बीच के पवित्र बंधन को मज़बूत करता है।

जीवित्पुत्रिका व्रत में धागे का महत्व

मातृ भक्ति का प्रतीक - जितिया धागा पहनना एक माँ के अपने बच्चों के प्रति निस्वार्थ प्रेम, प्रार्थना और त्याग को दर्शाता है। सुरक्षात्मक ताबीज - इस धागे को एक ताबीज माना जाता है जो नकारात्मक ऊर्जाओं और बुरी शक्तियों को दूर रखता है। व्रत अनुशासन की याद दिलाता है - जब तक धागा पहना जाता है, यह माँ को उसकी प्रतिज्ञाओं, प्रार्थनाओं और अपने बच्चों के लिए मांगे गए सुरक्षात्मक आशीर्वाद की याद दिलाता है।
आध्यात्मिक संबंध -
यह उपासक, देवता और उस बच्चे के बीच एक गहरा आध्यात्मिक संबंध स्थापित करता है जिसके कल्याण के लिए व्रत रखा जाता है।

Jitiya Thread 2025: महिलाएं क्यों पहनती हैं जिउतिया धागा? जानें इसका धार्मिक महत्व

जितिया धागा धारण करने की रस्म

महिलाएँ सूर्योदय के बाद सुबह जल्दी जीवित्पुत्रिका पूजा करती हैं। वे भगवान जीमूतवाहन की फूलों, फलों और प्रसाद से पूजा करती हैं। पुजारी पवित्र धागे को आशीर्वाद देते हैं, जिसे फिर गले या कलाई पर बाँध दिया जाता है। धागा बाँधने के बाद, महिलाएँ अगले दिन व्रत तोड़ने तक अपना निर्जल व्रत जारी रखती हैं। एक बार धारण करने के बाद, धागा आमतौर पर पूरे वर्ष के लिए रखा जाता है और अगले जितिया व्रत के दौरान बदल दिया जाता है।

निष्कर्ष

जितिया धागा एक वस्तु से कहीं बढ़कर है—यह प्रेम, सुरक्षा और विश्वास का एक पवित्र प्रतीक है। 14 सितंबर, 2025 को जीवित्पुत्रिका व्रत रखने वाली माताओं के लिए, यह धागा उनके बच्चों के स्वास्थ्य, दीर्घायु और समृद्धि के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा का प्रतीक है। इसे धारण करके, महिलाएँ न केवल भगवान जीमूतवाहन की कथा का सम्मान करती हैं, बल्कि पूरे वर्ष दिव्य आशीर्वाद भी प्राप्त करती हैं। इस प्रकार यह धागा माँ की प्रार्थना और बच्चे की सुरक्षा के बीच एक आध्यात्मिक बंधन बन जाता है। यह भी पढ़ें: Jitiya Vrat 2025: जितिया व्रत कब है, कौन रखता है इस व्रत को? जानें सबकुछ
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Senior Sub Editor (Feature)

Preeti Mishra is a seasoned journalist with over 12 years of rich experience in the media industry. Over the course of her career, she has worked with reputed media organizations such as DD News, Hindustan, Final Report, and Newstrack, building a strong foundation in credible and impactful journalism. She has extensively covered diverse beats including Religion, Health, Lifestyle, and Tourism, and is known for presenting complex topics in a clear, engaging, and reader-friendly manner. Her writing reflects a fine balance of authenticity, research, and public interest, making her stories both informative and relatable. Currently, She is associated with Hind First, where she is responsible for leading and curating content for the Religion, Health, Lifestyle, and Tourism sections. With her deep subject knowledge and editorial insight, she continues to deliver high-quality, meaningful content that resonates strongly with a wide audience.

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