जानें क्या है वो मामला जिसमें ED ने आंध्रप्रदेश के पूर्व CM जगनमोहन के खिलाफ की कार्रवाई?

ED ने जगन मोहन रेड्डी और डालमिया सीमेंट्स की ₹793.3 करोड़ की संपत्ति जब्त की, 14 साल पुराने क्विड प्रो क्वो घोटाले से जुड़ा मामला।

Rohit Agrawal
Published on: 19 April 2025 10:32 AM IST
जानें क्या है वो मामला जिसमें ED ने आंध्रप्रदेश के पूर्व CM जगनमोहन के खिलाफ की कार्रवाई?
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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 14 साल पुराने मनी लॉन्ड्रिंग केस में आंध्र प्रदेश के पूर्व CM वाईएस जगन मोहन रेड्डी और डालमिया सीमेंट्स (भारत) लिमिटेड (DCBL) के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ED ने जगन के ₹27.5 करोड़ के शेयर और डालमिया की ₹377.2 करोड़ की जमीन जब्त कर ली है, जिसकी मौजूदा कीमत ₹793.3 करोड़ है। यह मामला 2011 में CBI द्वारा दर्ज "क्विड प्रो क्वो" घोटाले से जुड़ा है, जिसमें जगन पर अपने पिता और तत्कालीन CM वाईएस राजशेखर रेड्डी के प्रभाव का इस्तेमाल कर डालमिया को फायदा पहुँचाने का आरोप है। आइए, इसे सरल भाषा में समझें, जैसे दोस्तों के साथ चाय पर गपशप!

जानिए क्या है पूरा मामला?

दरअसल 2011 में CBI ने डालमिया सीमेंट्स पर भारती सीमेंट कॉर्पोरेशन में निवेश के जरिए गलत तरीके से फायदा उठाने का केस दर्ज किया। जांच में पता चला कि डालमिया ने जगन की रघुराम सीमेंट्स लिमिटेड (बाद में भारती सीमेंट) में ₹95 करोड़ का निवेश किया था। इसके बदले, जगन ने अपने पिता वाईएस राजशेखर रेड्डी के प्रभाव से कडप्पा जिले में 407 हेक्टेयर का खनन पट्टा डालमिया को दिलवाया। यह "क्विड प्रो क्वो" डील थी, यानी "तुम मुझे फायदा दो, मैं तुम्हें फायदा दूँगा।" CBI और ED का आरोप है कि डालमिया, जगन, और पूर्व सांसद वी विजया साई रेड्डी ने रघुराम सीमेंट्स के शेयर फ्रेंच कंपनी PARFICIM को ₹135 करोड़ में बेचे, जिसमें से ₹55 करोड़ हवाला के जरिए जगन को नकद मिले। यह जानकारी आयकर विभाग के दस्तावेजों से मिली।

ED ने क्या कार्रवाई की?

ED ने 31 मार्च 2025 को जब्ती आदेश जारी किया, जो डालमिया को 15 अप्रैल को मिला। इसमें जगन के कार्मेल एशिया होल्डिंग्स, सरस्वती पावर, और हर्षा फर्म में ₹27.5 करोड़ के शेयर और डालमिया की ₹377.2 करोड़ की जमीन (मौजूदा कीमत ₹793.3 करोड़) जब्त की गई। ED का कहना है कि ₹95 करोड़ का निवेश वास्तविक नहीं, बल्कि आंध्र सरकार से अनुचित लाभ के लिए रिश्वत था। CBI ने 2013 में जगन, डालमिया, और अन्य के खिलाफ IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। जांच में यह भी सामने आया कि ₹139 करोड़ हवाला के जरिए जगन को देने की योजना थी, जिसमें से ₹55 करोड़ का भुगतान हो चुका था।

डालमिया और जगन ने क्या कहा?

डालमिया ने SEBI को बताया कि यह आदेश उनके रोजमर्रा के काम पर असर नहीं डालेगा और वे कानूनी कदम उठाएँगे। जगन की YSR कांग्रेस ने इसे "राजनीति से प्रेरित" कार्रवाई बताया। वहीं X पर लोग इसे "जगन के भ्रष्टाचार पर लगाम" बता रहे हैं, तो उनके समर्थक इसे "BJP की साजिश" कह रहे हैं।

क्यों अहम है यह कार्रवाई?

14 साल बाद हुई इस कार्रवाई से जगन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, खासकर 2024 में सत्ता गँवाने के बाद। यह केस दक्षिण भारत की सियासत में भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के सवाल उठाता है। ED की यह कार्रवाई केंद्र की सख्ती और पुराने मामलों को खोलने की रणनीति को भी दिखाती है।
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