University of Houston में हिंदू धर्म से जुड़े विवादास्पद कोर्स पर भड़के भारतीय छात्र, बताया हिंदू विरोधी

ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी (University of Houston) ने स्पष्ट किया कि यह पाठ्यक्रम हिंदू धर्म की आलोचना करने के लिए नहीं है, बल्कि यह समझने के लिए है कि हिंदू धर्म विभिन्न ऐतिहासिक, सामाजिक, और राजनीतिक संदर्भों में कैसे विकसित हुआ है।

Sunil Sharma
Published on: 29 March 2025 4:06 PM IST
University of Houston में हिंदू धर्म से जुड़े विवादास्पद कोर्स पर भड़के भारतीय छात्र, बताया हिंदू विरोधी
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ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी (University of Houston) में हिंदू धर्म को लेकर पढ़ाया जाने वाला एक विवादित कोर्स, जिसका नाम है 'Lived Hindu Religion', इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। भारतीय छात्र इस कोर्स का विरोध कर रहे हैं और इसे हिंदूफोबिक और हिंदू विरोधी बताया है। छात्रों ने इसमें शामिल "हिंदू विरोधी" शब्दावली और भारत के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य को विकृत करने के आरोप लगाए हैं। यह विवाद उस समय उठ खड़ा हुआ जब एक छात्र ने विश्वविद्यालय को शिकायत दी, जिसमें कोर्स को "हिंदू धर्म के खिलाफ" और "भारत की राजनीति को गलत तरीके से प्रस्तुत करने" का आरोप लगाया गया था। इस शिकायत के बाद विश्वविद्यालय ने अपनी शैक्षणिक स्वतंत्रता की रक्षा करते हुए इस मामले में प्रतिक्रिया दी।

यूनिवर्सिटी ने कहा, हम शैक्षणिक स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं

ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि विश्वविद्यालय शैक्षणिक स्वतंत्रता का सम्मान करता है और इस सिद्धांत पर जोर देता है कि फैकल्टी को उनके पाठ्यक्रमों में जटिल और चुनौतीपूर्ण विषयों पर शोध करने की अनुमति होनी चाहिए। बयान में यह भी कहा गया कि विश्वविद्यालय पाठ्यक्रमों की निगरानी करता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे उच्च शैक्षणिक मानकों पर खरे उतरते हैं, जबकि व्यक्तिगत व्याख्यानों की समीक्षा सामान्य तौर पर नहीं की जाती।

"कट्टरपंथ" शब्द को लेकर हुआ विवाद

इस मामले में विशेष रूप से "कट्टरपंथ" (Radicalism) शब्द पर विवाद हुआ। विश्वविद्यालय ने बताया कि यह शब्द धार्मिक अध्ययन के अकादमिक अनुशासन के तहत इस्तेमाल किया गया है, जो विभिन्न धर्मों के ऐतिहासिक और सामाजिक पहलुओं को समझने के लिए विश्लेषणात्मक उपकरण के रूप में काम करता है। इस संदर्भ में "कट्टरपंथ" का मतलब उन आंदोलनों से है जो अपने धर्म के "सच्चे" संस्करण को बचाने का दावा करते हैं, और यह शास्त्रों या विचारधाराओं की सख्त और शाब्दिक व्याख्या करते हैं। हालांकि, विश्वविद्यालय ने यह भी स्वीकार किया कि ऐसे शब्दों का प्रयोग कभी-कभी सार्वजनिक या राजनीतिक बहसों में भ्रामक हो सकता है, जिससे गलतफहमियां उत्पन्न हो सकती हैं।
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यूनिवर्सिटी ने कहा, हिंदू धर्म की आलोचना नहीं की जा रही है

ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी (University of Houston) ने स्पष्ट किया कि यह पाठ्यक्रम हिंदू धर्म की आलोचना करने के लिए नहीं है, बल्कि यह समझने के लिए है कि हिंदू धर्म विभिन्न ऐतिहासिक, सामाजिक, और राजनीतिक संदर्भों में कैसे विकसित हुआ है। प्रोफेसर छात्रों को यह पाठ्यक्रम समझाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, जिसमें समय-समय पर वर्तमान घटनाओं से जोड़कर हिंदू धर्म के विभिन्न पहलुओं को विश्लेषित किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, भारत में हिंदू राष्ट्रवाद के राजनीतिक उत्थान पर चर्चा करना इस पाठ्यक्रम का एक हिस्सा है, जिससे छात्रों को यह समझने में मदद मिलती है कि आधुनिक दुनिया में धर्म और धार्मिक विचार कैसे काम करते हैं। हालांकि, विश्वविद्यालय ने इसे समग्र रूप से हिंदू धर्म की आलोचना के रूप में प्रस्तुत करने से इंकार किया।

हिंदू-अमेरिकी कार्यकर्ता वसंत भट्ट ने लगाए कोर्स पर हिंदूफोबिक होने का आरोप

हिंदू-अमेरिकी कार्यकर्ता वसंत भट्ट ने इस कोर्स से संबंधित एक उद्धरण का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि यह कोर्स हिंदू धर्म को गलत तरीके से प्रस्तुत कर रहा है। उनका कहना था कि सिलेबस में "हिंदू" शब्द को हाल ही में पेश किया गया और यह शास्त्रों में नहीं पाया जाता। उन्होंने यह भी दावा किया कि हिंदुत्व एक ऐसा शब्द है जिसे हिंदू राष्ट्रवादी भारत में हिंदू धर्म को आधिकारिक धर्म बनाने की कोशिश में इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, प्रोफेसर आरोन माइकल उल्ले ने इस मुद्दे पर मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह उद्धरण संदर्भ से बाहर था और इसने पाठ्यक्रम (University of Houston) की असली मंशा को गलत तरीके से प्रस्तुत किया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि हिंदू धर्म एक प्राचीन और जीवित परंपरा है, न कि केवल एक औपनिवेशिक निर्माण या राजनीतिक उपकरण।
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