Papua New Guinea Earthquake: पापुआ न्यू गिनी में हिली ज़मीन, 6.9 तीव्रता का आया भूकंप, 5 लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित

शनिवार सुबह पापुआ न्यू गिनी में 6.9 तीव्रता का भूकंप आया, सुनामी की चेतावनी दी गई, लेकिन बाद में खतरा टल गया।

Vyom Tiwari
Published on: 5 April 2025 8:20 AM IST
Papua New Guinea Earthquake: पापुआ न्यू गिनी में हिली ज़मीन, 6.9 तीव्रता का आया भूकंप, 5 लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित
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शनिवार सुबह पापुआ न्यू गिनी में 6.9 तीव्रता का ज़ोरदार भूकंप आया। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक़, भूकंप का केंद्र न्यू ब्रिटेन आइलैंड पर किम्बे शहर से करीब 194 किलोमीटर दूर था और इसकी गहराई करीब 10 किलोमीटर थी। भूकंप के बाद, प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने पापुआ न्यू गिनी के कुछ तटीय इलाकों में 1 से 3 मीटर ऊंची लहरें आने की चेतावनी दी थी। लेकिन कुछ ही समय बाद इस चेतावनी को वापस ले लिया गया, यानी अब सुनामी का कोई खतरा नहीं है। सोलोमन आइलैंड के लिए भी 0.3 मीटर ऊंची लहरों की चेतावनी दी गई थी, जिसे बाद में हटा लिया गया। फिलहाल किसी तरह के नुकसान की कोई खबर नहीं है।

पांच लाख से ज्यादा लोग प्रभावित 

न्यू ब्रिटेन आइलैंड में 5 लाख से ज़्यादा लोग रहते हैं। पापुआ न्यू गिनी के पास आए इस भूकंप के बाद ऑस्ट्रेलिया के मौसम विभाग ने बताया कि उनके देश में सुनामी का कोई खतरा नहीं है। न्यूजीलैंड के लिए भी कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। पापुआ न्यू गिनी उस इलाके में आता है जिसे 'प्रशांत रिंग ऑफ फायर' कहा जाता है। यह इलाका दुनिया के सबसे ज़्यादा भूकंप और ज्वालामुखी वाले क्षेत्रों में गिना जाता है।

पापुआ न्यू गिनी में आया भूकंप 

पिछले महीने पापुआ न्यू गिनी में एक तेज़ भूकंप आया था, जिसकी तीव्रता 6.7 मापी गई। यह झटका इंडोनेशिया के पास के उत्तरी इलाके में महसूस किया गया। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज के अनुसार, भूकंप जमीन के नीचे करीब 65 किलोमीटर गहराई में आया था। अमेरिका की भूवैज्ञानिक एजेंसी ने बताया कि भूकंप का केंद्र अंबुंती नाम की एक छोटी बस्ती से करीब 32 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में था। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया के मौसम विभाग ने साफ किया है कि इस भूकंप से ऑस्ट्रेलिया को किसी तरह की सुनामी का खतरा नहीं है।

भूकंप आने का कारण?

धरती के नीचे 7 बड़ी प्लेट्स होती हैं जो लगातार हिलती-डुलती रहती हैं। जब ये प्लेट्स किसी जगह पर एक-दूसरे से ज्यादा टकराने लगती हैं, तो उस जगह को फॉल्ट लाइन जोन कहा जाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के किनारे मुड़ने लगते हैं और अंदर बहुत ज्यादा दबाव बन जाता है। जब ये दबाव बहुत बढ़ जाता है, तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। प्लेट्स के टूटने से जो ऊर्जा अंदर दब गई थी, वो बाहर निकलने की कोशिश करती है। इसी झटके से धरती हिलती है, जिसे हम भूकंप कहते हैं।

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