चार दिन में क्यों हुई सीजफायर? क्या है भारत-पाकिस्तान के सीजफायर का पूरा सच?

भारत और पाकिस्तान के बीच सीज़फायर लागू होने के बाद भी पाकिस्तान ने ड्रोन घुसपैठ की। भारत ने इसका कड़ा जवाब दिया और स्थिति गंभीर हो गई।

Vyom Tiwari
Published on: 11 May 2025 10:32 AM IST
चार दिन में क्यों हुई सीजफायर? क्या है भारत-पाकिस्तान के सीजफायर का पूरा सच?
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चार दिन तक मिसाइल अटैक, ड्रोन घुसपैठ और तोपों की गोलाबारी चलने के बाद इंडिया और पाकिस्तान ने जमीन, आसमान और समंदर तीनों जगहों पर लड़ाई रोकने का फैसला किया। ये फैसला 10 मई की शाम से लागू हो गया। लेकिन इस ऐलान के कुछ ही घंटे बाद जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में, जैसे श्रीनगर में, और गुजरात के कुछ हिस्सों में पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए और उन्हें वहीं रोक भी दिया गया। भारत ने कहा है कि पाकिस्तान ने सीज़फायर का उल्लंघन किया है। इसके जवाब में भारतीय सेना "ठीक और ज़रूरी जवाब" दे रही है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत इन उल्लंघनों को "बहुत ही गंभीरता से" लेता है। ये घटनाएं शुक्रवार सुबह से शुरू हुए बढ़ते फौजी टकराव के बाद सामने आईं।

लेकिन असल में हुआ क्या था? आइये इसे समझते है 

• सरकारी सूत्रों के मुताबिक, 10 मई की सुबह-सुबह भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान पर हमला किया। वायुसेना के लड़ाकू विमानों से ब्रह्मोस-ए मिसाइलें छोड़ी गईं, जो पाकिस्तान एयरफोर्स के अहम ठिकानों पर गिरीं। सबसे पहले असर देखा गया रावलपिंडी के पास चकलाला और पंजाब के सरगोधा में। ये दोनों जगहें पाकिस्तान की फौज के लिए काफी जरूरी मानी जाती हैं – खासकर एयरफोर्स और उनके सामान-लॉजिस्टिक्स के मामले में। बाकी ठिकानों – जैसे जैकोबाबाद, भोलारी और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्कर्दू पर हमले की पुष्टि शाम को हुई, जब एजेंसियों ने पूरी तरह से नुकसान का जायजा ले लिया, वो भी अपने लोगों और ओपन सोर्स इंटेलिजेंस के ज़रिए। • स्ट्राइक के कुछ ही देर बाद, भारत की खुफिया एजेंसियों ने पकड़ा कि पाकिस्तान की मिलिट्री नेटवर्क पर हाई अलर्ट वाले मैसेज चल रहे थे। इन मैसेजों से लग रहा था कि पाकिस्तान को शक है कि भारत अगला निशाना उनके न्यूक्लियर कमांड और कंट्रोल सिस्टम पर बना सकता है। रावलपिंडी में जो पाकिस्तान की स्ट्रैटेजिक प्लान्स डिविज़न से जुड़े ऑफिस हैं, वहां सिक्योरिटी और भी टाइट कर दी गई थी। • इसी पॉइंट पर पाकिस्तान ने अमेरिका से जल्दी दखल देने की गुज़ारिश की। सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका के अफसर पहले से ही दोनों देशों के संपर्क में थे, क्योंकि हालात बिगड़ने के आसार दिख रहे थे। लेकिन जब बात रणनीतिक हथियारों (strategic assets) तक पहुँच गई, तो वॉशिंगटन ने थोड़ा और सख्ती से कदम उठाया। • अमेरिका ने बाहर से तो न्यूट्रल रहने की कोशिश की, लेकिन अंदर ही अंदर इस्लामाबाद को साफ-साफ संदेश दे दिया है – फौजी हॉटलाइन का इस्तेमाल करो और बिना देर किए हालात को शांत करो। खबरों के मुताबिक, अमेरिका ने पाकिस्तान से ये तक कह दिया कि इंडियन आर्मी से सीधे बात करो और किसी भी तरह की देरी मत करो। • 10 मई की दोपहर तक, जब पाकिस्तान की तरफ से की गई कई आक्रामक चालों को भारत ने पीछे धकेल दिया, तब पाकिस्तान के डीजीएमओ मेजर जनरल काशिफ अब्दुल्ला ने सीधे भारत के डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई को फोन किया। ये कॉल इंडियन टाइम के मुताबिक दोपहर 3 बजकर 35 मिनट पर हुई थी, जिसकी पुष्टि बाद में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में की। • भारत ने अपने इस रुख को बरकरार रखा कि वह पाकिस्तान के साथ कोई भी औपचारिक कूटनीतिक या सैन्य बातचीत प्रोटोकॉल के बाहर नहीं करेगा। इसका मतलब ये था कि अंतर्राष्ट्रीय दबाव के बावजूद, दिल्ली ने मध्यस्थता करने से मना कर दिया और यह संकेत दिया कि भारतीय सशस्त्र बल अगले चरण की तैयारी में हैं, जिसमें ऊर्जा और आर्थिक लक्ष्यों के साथ-साथ गहरे रणनीतिक कमांड स्ट्रक्चर्स और सरकारी ढांचे पर हमले शामिल हो सकते थे, सरकारी सूत्रों के मुताबिक। • भारत ने यह पुष्टि की कि 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद जो फैसले लिए गए थे, जैसे कि इंडस वाटर ट्रीटी (IWT) को अस्थायी रूप से स्थगित करना, वे सीजफायर के बावजूद बदलेंगे नहीं।

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