Health Alert: पार्किंसंस सिर्फ हाथ कांपना नहीं, नई स्टडी में सामने आए इसके और छिपे हुए लक्षण

एक हालिया अध्ययन ने कई ऐसे छिपे हुए लक्षणों पर प्रकाश डाला है जो अक्सर दिखाई देने वाले कंपन शुरू होने से कई साल पहले ही प्रकट हो जाते हैं।

Preeti Mishra
Published on: 10 April 2026 3:36 PM IST
Health Alert: पार्किंसंस सिर्फ हाथ कांपना नहीं, नई स्टडी में सामने आए इसके और छिपे हुए लक्षण
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Health Alert: जब ज़्यादातर लोग पार्किंसंस रोग के बारे में सोचते हैं, तो उनके दिमाग में सबसे पहले हाथों का कांपना आता है। हालांकि हाथों का कांपना एक आम लक्षण है, लेकिन विशेषज्ञ अब इस बात पर ज़ोर देते हैं कि पार्किंसंस एक जटिल तंत्रिका संबंधी स्थिति है जिसके कई कम ज्ञात चेतावनी संकेत होते हैं। एक हालिया अध्ययन ने कई ऐसे छिपे हुए लक्षणों पर प्रकाश डाला है जो अक्सर दिखाई देने वाले कंपन शुरू होने से कई साल पहले ही प्रकट हो जाते हैं।

इन शुरुआती संकेतों को समझने से समय पर निदान और रोग के बेहतर प्रबंधन में मदद मिल सकती है।

पार्किंसंस रोग क्या है?

पार्किंसंस रोग एक प्रगतिशील विकार है जो तंत्रिका तंत्र और गति को प्रभावित करता है। यह मस्तिष्क में डोपामाइन उत्पन्न करने वाले न्यूरॉन्स के धीरे-धीरे नष्ट होने के कारण होता है। डोपामाइन एक ऐसा रसायन है जो मांसपेशियों की सुचारू और समन्वित गति के लिए ज़िम्मेदार होता है। डोपामाइन का स्तर गिरने पर शरीर में कई शारीरिक और गैर-शारीरिक लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

कंपन से परे: छिपे हुए लक्षण जिन्हें आपको नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए

हालिया शोध बताते हैं कि पार्किंसंस अक्सर सूक्ष्म, गैर-गतिशील लक्षणों से शुरू होता है जिन्हें आसानी से अनदेखा किया जा सकता है।

गंध का अभाव (एनोस्मिया): सबसे शुरुआती चेतावनी संकेतों में से एक है गंध की क्षमता में कमी। कई लोगों को सुगंध, भोजन की महक या यहां तक कि तेज गंध को पहचानने में कठिनाई होती है। यह लक्षण चलने-फिरने संबंधी समस्याओं के विकसित होने से कई साल पहले दिखाई दे सकता है।

नींद संबंधी विकार: नींद से संबंधित समस्याएं भी आम हैं। लोगों को बेचैन नींद, स्पष्ट सपने या नींद के दौरान अचानक हलचल का अनुभव हो सकता है। आरईएम स्लीप बिहेवियर डिसऑर्डर जैसी स्थितियां अक्सर पार्किंसंस रोग के शुरुआती लक्षणों से जुड़ी होती हैं।

कब्ज़ और पाचन संबंधी समस्याएं: पाचन संबंधी समस्याएं, खासकर पुराना कब्ज़, अक्सर देखने को मिलता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पार्किंसंस ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर सकता है, जो पाचन को नियंत्रित करता है।

मूड में बदलाव और डिप्रेशन: शुरुआती चरणों में डिप्रेशन, बेचैनी और मूड में उतार-चढ़ाव हो सकता है। इन लक्षणों को अक्सर गलत समझा जाता है या तनाव का नतीजा माना जाता है, लेकिन ये न्यूरोलॉजिकल बदलावों के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

थकान और कम ऊर्जा: बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार थकान महसूस होना एक और छिपा हुआ लक्षण है। कई लोग बताते हैं कि पर्याप्त आराम करने के बाद भी उन्हें असामान्य रूप से थकान महसूस होती है।

सूक्ष्म बदलाव

दिखने वाले कंपकंपी (tremors) से भी पहले, छोटे-मोटे बदलाव हो सकते हैं।

धीमी हरकतें (ब्रैडीकाइनेसिया)

चेहरे के हाव-भाव में कमी (मास्क्ड फेस)

धीमी या अस्पष्ट बोली

लिखने के तरीके में बदलाव (छोटी और सिकुड़ी हुई लिखावट)

ये संकेत अक्सर धीरे-धीरे उभरते हैं और हो सकता है कि इन्हें तुरंत पार्किंसंस के लक्षणों के तौर पर न पहचाना जाए।

नई स्टडी क्या कहती है?

हाल की स्टडी इस बात पर ज़ोर देती है कि पार्किंसंस को सिर्फ़ एक मूवमेंट डिसऑर्डर (हरकत संबंधी विकार) के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। शोधकर्ताओं ने पाया कि नॉन-मोटर लक्षण, कंपकंपी जैसे क्लासिक संकेतों से एक दशक पहले तक दिखाई दे सकते हैं। इससे ध्यान शुरुआती पहचान की ओर मुड़ा है। नींद में गड़बड़ी, सूंघने की शक्ति में कमी और मूड में बदलाव जैसे लक्षणों की पहचान करने से डॉक्टरों को इस बीमारी का जल्द पता लगाने और इलाज शुरू करने में मदद मिल सकती है।

शुरुआती पहचान से पार्किंसंस ठीक तो नहीं होता, लेकिन यह बीमारी के बढ़ने की गति को धीमा करके और लक्षणों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करके जीवन की गुणवत्ता में काफ़ी सुधार ला सकता है।

शुरुआती जागरूकता क्यों ज़रूरी है?

इन छिपे हुए लक्षणों को पहचानना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि कई लोग बीमारी बढ़ने तक इन्हें नज़रअंदाज़ करते रहते हैं। समय पर डॉक्टर से सलाह लेने से इलाज की बेहतर रणनीतियाँ अपनाई जा सकती हैं, जिनमें दवाएँ, जीवनशैली में बदलाव और थेरेपी शामिल हैं। डॉक्टर अक्सर इस बीमारी को कंट्रोल करने के लिए नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने की सलाह देते हैं।

आपको डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

अगर आपको ये लक्षण दिखाई दें, तो आपको किसी हेल्थकेयर प्रोफेशनल से सलाह लेनी चाहिए:

लगातार सूंघने की शक्ति कम होना

लगातार नींद में दिक्कत होना

बिना किसी वजह के थकान महसूस होना

बार-बार कब्ज़ होना

हाथ-पैर हिलाने या बोलने के तरीके में हल्के बदलाव आना

हालांकि, ये लक्षण हमेशा पार्किंसंस की ओर इशारा नहीं करते, फिर भी इनकी जाँच करवाना बेहतर होता है खासकर तब, जब कई लक्षण एक साथ दिखाई दें।

Preeti Mishra

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Senior Sub Editor (Feature)

Preeti Mishra is a seasoned journalist with over 12 years of rich experience in the media industry. Over the course of her career, she has worked with reputed media organizations such as DD News, Hindustan, Final Report, and Newstrack, building a strong foundation in credible and impactful journalism. She has extensively covered diverse beats including Religion, Health, Lifestyle, and Tourism, and is known for presenting complex topics in a clear, engaging, and reader-friendly manner. Her writing reflects a fine balance of authenticity, research, and public interest, making her stories both informative and relatable. Currently, She is associated with Hind First, where she is responsible for leading and curating content for the Religion, Health, Lifestyle, and Tourism sections. With her deep subject knowledge and editorial insight, she continues to deliver high-quality, meaningful content that resonates strongly with a wide audience.

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