Gujarat News: स्कूल में खतरनाक खेल ने बच्चों को पहुंचाया अस्पताल, 25 से ज्यादा छात्रों के हाथों पर ब्लेड के निशान

Gujarat News: अमरेली जिले के मुंजियासर गांव के प्राथमिक स्कूल में जो हुआ, उसने हर किसी को हैरान कर दिया है।

Ritu Shaw
Published on: 26 March 2025 3:10 PM IST
Gujarat News: स्कूल में खतरनाक खेल ने बच्चों को पहुंचाया अस्पताल, 25 से ज्यादा छात्रों के हाथों पर ब्लेड के निशान
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Gujarat News: अमरेली जिले के मुंजियासर गांव के प्राथमिक स्कूल में जो हुआ, उसने हर किसी को हैरान कर दिया। स्कूल में पांचवीं से आठवीं कक्षा के 25 से ज्यादा बच्चों के हाथों पर ब्लेड के गहरे निशान मिले। जब माता-पिता को इसकी भनक लगी तो स्कूल में हंगामा मच गया और मामला सीधा पुलिस तक पहुंच गया।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, स्कूल में बच्चों के बीच 'ट्रुथ एंड डेयर' खेला जा रहा था, लेकिन ये खेल इतनी खतरनाक शर्तों में बदल गया कि बच्चों ने अपनी जान की परवाह किए बिना खुद को ब्लेड से घायल कर लिया। जानकारी के मुताबिक, सातवीं कक्षा के एक बच्चे ने चुनौती दी थी। "जो अपने हाथ पर ब्लेड से कट लगाएगा, उसे 10 रुपये इनाम मिलेगा। जो नहीं लगाएगा, उसे उल्टा 5 रुपये देने पड़ेंगे।" बस फिर क्या था, बच्चों ने शार्पनर की ब्लेड निकाली और एक-एक कर अपने हाथों पर निशान बना डाले।

स्कूल प्रशासन ने दबाने की कोशिश की

मामला जब स्कूल प्रशासन तक पहुंचा तो उन्होंने बच्चों को साफ-साफ कह दिया — "घर पर किसी को कुछ मत बताना, अगर कोई पूछे तो बोल देना खेलते वक्त गिर गए थे।" लेकिन एक बच्चे की सच्चाई उसके घर वालों तक पहुंच गई और फिर मामला धीरे-धीरे पूरे गांव में फैल गया।

पुलिस ने शुरू की तहकीकात

गांव में हड़कंप मचते ही धारी के सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) जयवीर गढ़वी स्कूल पहुंचे। बच्चों से बातचीत की, सीसीटीवी देखा और पूरा माजरा समझ में आ गया। ASP ने साफ कहा — "ये कोई ऑनलाइन गेम का असर नहीं है, ये सब बच्चों के बीच हुए एक खतरनाक 'डर या चुनौती' गेम का नतीजा है।"

अभिभावकों का फूटा गुस्सा

बच्चों के हाथों पर कट के निशान देख गांव के लोग आग-बबूला हो गए। अभिभावकों ने स्कूल की लापरवाही पर सवाल उठाए — "इतनी बड़ी घटना हो गई और स्कूल छुपाता रहा?" गांव के सरपंच से लेकर पंचायत तक बात पहुंची और फिर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई। पुलिस और शिक्षा विभाग दोनों ने जांच शुरू कर दी है। जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी (DPEO) को भी इसकी जानकारी दे दी गई है। अब इस बात की तलाश है कि आगे से ऐसा कुछ ना हो और बच्चों की सुरक्षा सबसे पहले रखी जाए।

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