वैज्ञानिकों को मिला एक और महाद्वीप, करोड़ों वर्षों से बर्फ के नीचे छुपा हुआ था ये रहस्यमई द्वीप

वैज्ञानिकों ने ग्रीनलैंड के बर्फ के नीचे एक प्राचीन महाद्वीपीय टुकड़ा खोजा है, जो करोड़ों साल से छुपा हुआ था। यह माइक्रोमहाद्वीप माना जाता है।

Vyom Tiwari
Published on: 19 April 2025 11:30 AM IST
वैज्ञानिकों को मिला एक और महाद्वीप, करोड़ों वर्षों से बर्फ के नीचे छुपा हुआ था ये रहस्यमई द्वीप
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ग्रीनलैंड की बर्फ के नीचे वैज्ञानिकों को एक चौंकाने वाली चीज़ मिली है। उन्होंने वहां एक पुराना महाद्वीपीय टुकड़ा खोजा है, जो शायद करोड़ों साल से बर्फ के नीचे छुपा हुआ था। ये हिस्सा किसी ज़माने में एक माइक्रोमहाद्वीप रहा होगा। यह टुकड़ा ग्रीनलैंड और कनाडा के बीच मौजूद एक जटिल भूगर्भीय दरार यानी टेक्टोनिक रिफ्ट सिस्टम का हिस्सा है। इसे खोजने के लिए वैज्ञानिकों ने खास तरह की तकनीकों का इस्तेमाल किया – जैसे कि गुरुत्वाकर्षण से जुड़ी मैपिंग और भूकंप के कंपनों को पकड़ने वाली इमेजिंग तकनीक। इस खोज के बाद अब वैज्ञानिकों को उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र की बनावट को लेकर कुछ नई बातें समझ में आने लगी हैं।

कनाडा और ग्रीनलैंड के बीच का इलाका

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा और ग्रीनलैंड के बीच जो इलाका है, वहां एक नया महाद्वीप मिला है। ये जगह पहले से ही काफी अहम मानी जाती रही है, क्योंकि यहां की ज़मीन के नीचे की बनावट काफी उलझी हुई है। इसी इलाके में लैब्राडोर सागर और बैफिन खाड़ी, डेविस जलडमरूमध्य के ज़रिए आपस में जुड़ते हैं। माना जाता है कि ये इलाका पेलियोजीन काल के दौरान बना था, जो लगभग 61 से 33 मिलियन साल पहले का समय है। उस वक्त धरती की परतें टूटने लगी थीं। इसी टूट-फूट के चलते रिफ्टिंग शुरू हुई और समुद्र की ज़मीन फैलने लगी।

वैज्ञानिकों का इसपर क्या कहना है ?

वैज्ञानिकों का मानना है कि महाद्वीपीय क्रस्ट का यह हिस्सा करीब 19 से 24 किलोमीटर गहराई में मौजूद है। यह हिस्सा कभी पूरी तरह से अलग नहीं हुआ था, इसलिए ये समुद्र की सतह के नीचे दबा रह गया। आज इस खास हिस्से को डेविस स्ट्रेट प्रोटो-माइक्रोकॉन्टिनेंट कहा जाता है। यह नाम उस महाद्वीपीय परत के टुकड़े के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है जो न तो किसी बड़े भूभाग से पूरी तरह जुड़ा है और न ही उससे पूरी तरह अलग हुआ है। वैज्ञानिकों ने यह समझने के लिए कि ज़मीन के अंदर कौन-कौन से बदलाव हुए हैं, गुरुत्वाकर्षण के नक्शों और भूकंप से जुड़ी इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल किया। इससे उन्हें यह जानने में मदद मिली कि समुद्र की ज़मीन फैलने की दिशा करीब 49 से 58 मिलियन साल पहले बदल गई थी। पहले यह दिशा पूर्वोत्तर से दक्षिण पश्चिम थी, लेकिन बाद में यह उत्तर से दक्षिण हो गई। इस बदलाव ने उस छोटे भू-भाग की स्थिति को काफी हद तक प्रभावित किया, जिसे प्रोटो-माइक्रोकॉन्टिनेंट कहा जाता है।

पृथ्वी की सतह को लेकर बढ़ेगी समझ

करीब 3 करोड़ 30 लाख साल पहले इस इलाके में समुद्र का फैलाव रुक गया था। इसके बाद ग्रीनलैंड जाकर एलेस्मेरे द्वीप से टकराया और फिर उत्तरी अमेरिका की प्लेट का हिस्सा बन गया। यह आखिरी बार था जब इस क्षेत्र में ज़मीन की प्लेटों ने कोई बड़ा बदलाव किया। पहले जहां एक छोटा सा माइक्रोकॉन्टिनेंट था, अब वहां समुद्र के नीचे की ज़मीन और ग्रीनलैंड के पश्चिमी किनारे का हिस्सा बन गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज पृथ्वी की सतह को लेकर हमारी सोच को नई दिशा दे सकती है। प्लेट टेक्टोनिक्स यानी पृथ्वी की सतह कैसे बनी और समय के साथ कैसे बदलती रही, इसे समझने में यह जानकारी अहम हो सकती है। साथ ही यह भी अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि कैसे महाद्वीप अलग-अलग हुए और नए महासागर बने।

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