विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में की जोरदार वापसी, दो हफ्तों में किया 22,766 करोड़ रुपये का भारी निवेश

एफपीआई ने 13 दिसंबर तक भारतीय शेयर बाजार में कुल 22,766 करोड़ रुपए का निवेश किया है।नवंबर में महंगाई दर घटकर 5.48% हो गई है, जिससे निवेशकों को राहत मिली है और उनकी उम्मीदें बढ़ी हैं।

Vyom Tiwari
Published on: 15 Dec 2024 4:53 PM IST
विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में की जोरदार वापसी, दो हफ्तों में किया 22,766 करोड़ रुपये का भारी निवेश
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अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना जताई गई है, जिसके बाद से ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय बाजार में अपनी वापसी शुरू की है। दिसंबर के पहले दो हफ्तों में एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजारों (Indian Stock Market) में कुल 22,766 करोड़ रुपए का निवेश किया है। इससे पहले नवंबर में एफपीआई ने भारतीय बाजार से 21,612 करोड़ रुपए और अक्टूबर में 94,017 करोड़ रुपए की बड़ी निकासी की थी। अक्टूबर में हुई निकासी का आंकड़ा काफी नकरात्मक था।

इन कारणों पर निर्भर करेगा FPI 

सितंबर में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने शेयर बाजार (Stock Market) में रिकॉर्ड तोड़ निवेश किया था जो 57,724 करोड़ रुपए के नौ महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। इससे यह बात स्पष्ट होती है कि विदेशी निवेशक अपने निवेश के फैसलों में अभी भी स्थिर नहीं हैं। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक इस नए निवेश के साथ 2024 में अब तक शेयर बाजार में FPI का कुल निवेश 7,747 करोड़ रुपए हो चुका है। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के एसोसिएट निदेशक, हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय शेयर बाजार में आगे विदेशी निवेशकों का प्रवाह कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करेगा। इनमें डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां, मौजूदा महंगाई और ब्याज दर की स्थिति, और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम शामिल हैं। इसके अलावा, भारतीय कंपनियों के तीसरी तिमाही के परिणाम और देश की आर्थिक वृद्धि भी निवेशकों के रुझान को प्रभावित करेंगे।

कम हुई महंगाई ने बाजार किया गुलज़ार 

डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने इस महीने 13 दिसंबर तक भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) में 22,766 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि उम्मीद की जा रही है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व) ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। वॉटरफील्ड एडवाइजर्स के वरिष्ठ निदेशक विपुल भोवर के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कैश रिजर्व रेशियो (CRR) कम करके बाजार में नकदी बढ़ाई है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। इसके साथ ही उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर अक्टूबर में 6.21% थी जो नवंबर में घटकर 5.48% हो गई। इससे उम्मीद बढ़ी है कि आरबीआई अपनी अगली मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट घटा सकता है। इन सभी कारणों ने निवेशकों को भारतीय बाजार में पैसे लगाने के लिए प्रेरित किया है। इस साल अब तक एफपीआई ने ऋण और बॉन्ड बाजार में 1.1 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है।  इसी दौरान, उन्होंने बॉन्ड में सामान्य सीमा के तहत 4,814 करोड़ रुपए का निवेश किया है जबकि स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग (वीआरआर) से 666 करोड़ रुपए की निकासी की है। यह भी पढ़े:
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