Festivals 2025: कब है मकर संक्रांति, लोहड़ी और पोंगल? जानिए सही तिथि, मुहूर्त और महत्व

मकर संक्रांति का बहुत ही ज्यादा आध्यात्मिक महत्व है क्योंकि यह नवीनीकरण और आशा का प्रतीक है।

Preeti Mishra
Published on: 7 Jan 2025 11:32 AM IST
Festivals 2025: कब है मकर संक्रांति, लोहड़ी और पोंगल? जानिए सही तिथि, मुहूर्त और महत्व
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Festivals 2025: जनवरी का महीना त्योहारों से भरा रहता है। यही वह महीना है जिसमें सूर्य उत्तरायण होते है। इसी महीने सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं इसलिए मकर संक्रांति (Festivals 2025) का त्योहार मनाया जाता है। मकर संक्रांति के अलावा लोहड़ी और पोंगल भी इसी महीने मनाया जाता है। आइए जानते हैं यह तीनों त्योहार इस महीने कब मनाए जाएंगे और क्या है इनका महत्व?

मकर संक्रांति तिथि, मुहूर्त और महत्व

मकर संक्रांति, हर साल 14 जनवरी (Makar Sankranti 2025 Date) को मनाई जाती है। यह सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और उसके उत्तर की ओर यात्रा (उत्तरायण) का प्रतीक है। हिंदू सौर कैलेंडर के अनुसार, यह त्योहार सर्दियों के अंत और लंबे, गर्म दिनों की शुरुआत का प्रतीक है। हिंदू धर्म में अन्य त्योहारों के विपरीत, जो चंद्र-सौर हिंदू कैलेंडर के अनुसार निर्धारित किए जाते हैं, इस त्योहार को सौर कैलेंडर (Festivals 2025) के अनुसार माना जाता है और इस प्रकार यह ग्रेगोरियन कैलेंडर में हर साल लगभग एक ही दिन पड़ता है। केवल लीप ईयर वाले वर्ष में मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाती है। लीप वर्ष के कारण मकर राशि का नक्षत्र समय भी एक दिन आगे बढ़ जाता है।
Festivals 2025: कब है मकर संक्रांति, लोहड़ी और पोंगल? जानिए सही तिथि, मुहूर्त और महत्व
मकर संक्रांति पुण्य काल मुहूर्त (Makar Sankranti 2025 Muhurat) सुबह सुबह 09:03 बजे से शाम 06:12 बजे तक है। वहीं मकर संक्रांति महा पुण्य काल प्रातः 09:03 बजे से प्रातः 10:58 बजे तक है। मकर संक्रांति क्षण सुबह 09:03 मिनट पर है। मकर संक्रांति का बहुत ही ज्यादा आध्यात्मिक महत्व (Makar Sankranti Significance) है क्योंकि यह नवीनीकरण और आशा का प्रतीक है। इस दिन श्रद्धालु गंगा जैसी नदियों में पवित्र स्नान करते हैं, प्रार्थना करते हैं और दान देते हैं। भारत के विभिन्न हिस्सों में इसे अनूठी परंपराओं के साथ मनाया जाता है। गुजरात में इसे पतंग उड़ा कर मनाया जाता है तो वहीं उत्तर भारत में इसे खिचड़ी के रूप में मनाया जाता है।

लोहड़ी तिथि, मुहूर्त और महत्व

लोहड़ी 13 जनवरी (Lohri 2025 Date) को मनाई जाएगी। यह त्योहार सर्दियों के अंत और उत्तरी भारत, खासकर पंजाब और हरियाणा में फसल के मौसम की शुरुआत का प्रतीक है। लोहड़ी एक लोकप्रिय त्योहार है जिसे सिख धर्म और हिंदू धर्म के लोग दोनों मनाते हैं। हालांकि, लोहड़ी मुख्य रूप से सिख त्योहार लेकिन इसकी तिथि हिंदू कैलेंडर के आधार पर तय की (Festivals 2025) जाती है। लोहड़ी का हिंदू त्यौहार मकर संक्रांति से गहरा संबंध है और इसे उससे एक दिन पहले मनाया जाता है। लोहड़ी लाल लोई के नाम से भी जाना जाता है।
Festivals 2025: कब है मकर संक्रांति, लोहड़ी और पोंगल? जानिए सही तिथि, मुहूर्त और महत्व
लोहड़ी का पर्व अग्नि देवता का सम्मान (Lohri 2025 Significance) करता है, जो गर्मी और समृद्धि का प्रतीक है। यह त्योहार गन्ने, मूंगफली और तिल जैसी फसलों की कटाई का जश्न मनाता है, जिसमें पॉपकॉर्न, गुड़ और रेवड़ी सहित अलाव पर प्रसाद चढ़ाया जाता है। लोहड़ी के दिन, रॉबिन हुड की छवि वाले दुल्ला भट्टी जैसे लोकगीत नायकों को भी याद करती है। इस दिन परिवार अलाव के चारों ओर इकट्ठा होते हैं, पारंपरिक गीत गाते हैं और भांगड़ा और गिद्दा नृत्य करते हैं। यह आभार, सामुदायिक बंधन और आने वाले वर्ष में प्रचुरता और खुशी की कामना करने का समय होता है।

पोंगल तिथि, मुहूर्त और महत्व

पोंगल तमिल कैलेंडर के थाई महीने में मनाया जाता है। यह चार दिन तक चलने वाला त्योहार है जो मार्गाज़ी महीने के आखिरी दिन से शुरू होता है और थाई महीने के तीसरे दिन समाप्त होता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, यह हर साल 13-16 जनवरी के बीच पड़ता है। पोंगल मकर संक्रांति के त्योहार के साथ मेल खाता है, जिसे पूरे भारत में मनाया जाता है। पोंगल 2025 14 जनवरी, मंगलवार (Pongal 2025 Date) को है। पोंगल का सबसे महत्वपूर्ण दिन थाई पोंगल (Thai Pongal) के नाम से जाना जाता है। थाई पोंगल जो चार दिनों के उत्सव का दूसरा दिन है, उसे संक्रांति के रूप में भी मनाया जाता है। इसी दिन उत्तर भारतीय राज्यों में मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है, जब लोग गंगा नदी में पवित्र स्नान करते हैं।
Festivals 2025: कब है मकर संक्रांति, लोहड़ी और पोंगल? जानिए सही तिथि, मुहूर्त और महत्व
थाई पोंगल (Pongal 2025 Significance) से पहले के दिन को बोगी पंडीगई के नाम से जाना जाता है। इस दिन लोग अपने घरों की सफाई करते हैं और अप्रयुक्त वस्तुओं को फेंकने के लिए अलाव जलाते हैं। पंजाब में इसी दिन सिख समुदाय द्वारा लोहड़ी मनाई जाती है। थाई पोंगल दिवस को एक नए मिट्टी के बर्तन में ताजा दूध और गुड़ के साथ ताजा चावल उबालकर मनाया जाता है। मिश्रण को उबालते समय, लोग दूध को बर्तन के ऊपर गिरने देते हैं, जो भौतिक समृद्धि का शुभ संकेत है। बाद में चावल, दूध और गुड़ के मिश्रण को पोंगल के रूप में जाना जाता है, जिसके ऊपर ब्राउन शुगर, घी, काजू और किशमिश डाली जाती है। ताजा पका हुआ पोंगल (What is Pongal) सबसे पहले अच्छी फसल के लिए आभार के रूप में सूर्य देव को अर्पित किया जाता है और बाद में समारोह के लिए घर में मौजूद लोगों को केले के पत्तों पर परोसा जाता है। पारंपरिक रूप से पोंगल सूर्योदय के समय एक खुली जगह पर पकाया जाता है। यह भी पढ़ें: Amrit Snan: महाकुंभ का शाही स्नान अब हुआ अमृत स्नान, जानें मेले की सभी छह पवित्र तिथियां
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Senior Sub Editor (Feature)

Preeti Mishra is a seasoned journalist with over 12 years of rich experience in the media industry. Over the course of her career, she has worked with reputed media organizations such as DD News, Hindustan, Final Report, and Newstrack, building a strong foundation in credible and impactful journalism. She has extensively covered diverse beats including Religion, Health, Lifestyle, and Tourism, and is known for presenting complex topics in a clear, engaging, and reader-friendly manner. Her writing reflects a fine balance of authenticity, research, and public interest, making her stories both informative and relatable. Currently, She is associated with Hind First, where she is responsible for leading and curating content for the Religion, Health, Lifestyle, and Tourism sections. With her deep subject knowledge and editorial insight, she continues to deliver high-quality, meaningful content that resonates strongly with a wide audience.

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