ELECTORAL BOND: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिया बड़ा झटका, चुनावी बांड योजना को असंवैधानिक घोषित किया...

Bodhayan Sharma
Published on: 15 Feb 2024 6:37 PM IST
ELECTORAL BOND: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिया बड़ा झटका, चुनावी बांड योजना को असंवैधानिक घोषित किया...
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राजस्थान (डिजिटल डेस्क)। ELECTORAL BOND: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को बड़ा झटका देते हुए चुनावी बांड (ELECTORAL BOND) योजना को असंवैधानिक करार दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को केंद्र के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने माना कि नागरिकों की निजता के मौलिक अधिकार में राजनीतिक निजता और एसोसिएशन का अधिकार शामिल है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि दो अलग-अलग लेकिन सर्वसम्मत फैसले थे।
सरकार ने 2018 में नोटिफिकेशन किया था
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने पिछले साल 2 नवंबर को मामले में अपना फैसला सुरक्षित (ELECTORAL BOND) रख लिया था। सरकार द्वारा 2 जनवरी 2018 को बांड योजना की घोषणा की गई थी। इसे राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता लाने के प्रयासों के तहत राजनीतिक दलों को चंदा देने के विकल्प के रूप में पेश किया गया था। https://twitter.com/ANI/status/1758001523706007941?ref_src=twsrc^tfw|twcamp^tweetembed|twterm^1758001523706007941|twgr^0cbfdbf30cef3b2ea9271df6006d48303b23002c|twcon^s1_&ref_url=https://www.gujaratfirst.com/read/national-read/electoral-bonds-supreme-court-deals-major-blow-to-centre-declares-electoral-bond-scheme-unconstitutional/
योजना में ये प्रावधान
योजना के प्रावधानों के अनुसार, चुनावी बांड (ELECTORAL BOND) भारत का कोई भी नागरिक या देश में निगमित या निगमित कोई भी इकाई खरीद सकता है। कोई भी व्यक्ति अकेले या अन्य व्यक्तियों के साथ संयुक्त रूप से चुनावी बांड खरीद सकता है। संविधान पीठ में न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल हैं। पीठ ने पिछले साल 31 अक्टूबर को कांग्रेस नेता जया ठाकुर, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) द्वारा दायर चार याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की थी।
जानिए क्या है इलेक्टोरल बॉन्ड योजना?
2018 में सरकार द्वारा प्रस्तावित चुनावी बांड (ELECTORAL BOND) योजना को राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता लाने के प्रयासों के तहत राजनीतिक दलों को नकद दान के विकल्प के रूप में देखा गया था। इसे केवल वे ही राजनीतिक दल प्राप्त कर सकते हैं, जो प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के तहत पंजीकृत हैं और जिन्हें पिछले लोकसभा या राज्य चुनावों में एक प्रतिशत से अधिक वोट मिले हैं।
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