Dussehra 2025: कल है दशहरा, प्रदोष काल में होगा रावण दहन, जानें समय

द्रिक पंचांग के अनुसार, रावण के पुतला दहन की रस्म प्रदोष काल में की जानी चाहिए, जो सूर्यास्त के बाद शुरू होता है।

Preeti Mishra
Published on: 1 Oct 2025 2:37 PM IST
Dussehra 2025: कल है दशहरा, प्रदोष काल में होगा रावण दहन, जानें समय
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Dussehra 2025: दशहरा, जिसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है, कल गुरुवार 2 अक्टूबर को पुरे भारत में मनाया जाएगा। सबसे प्रसिद्ध हिंदू त्योहारों में से एक यह बुराई पर अच्छाई की जीत (Dussehra 2025) का प्रतीक है। यह रावण पर भगवान राम की विजय और राक्षस महिषासुर पर देवी दुर्गा की विजय का प्रतीक है। इस वर्ष भक्त पूरे भारत में पूजा-अर्चना, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और रामलीला प्रदर्शनों के साथ विजयादशमी (Vijayadashmi 2025) मनाएंगे।

दशहरा 2025 के लिए महत्वपूर्ण समय

द्रिक पंचांग के अनुसार, दशमी तिथि 1 अक्टूबर 2025 को शाम 7:01 बजे शुरू हो जाएगी और इसका समापन 2 अक्टूबर को शाम 7:10 बजे होगा। विजय मुहूर्त: दोपहर 2:10 बजे से दोपहर 2:57 बजे तक अपराह्न पूजा का समय: दोपहर 1:22 बजे से दोपहर 3:44 बजे तक श्रवण नक्षत्र प्रारंभ: 2 अक्टूबर 2025 को सुबह 9:13 बजे श्रवण नक्षत्र समाप्त: 3 अक्टूबर 2025 को सुबह 9:34 बजे

Dussehra 2025: कल है दशहरा, प्रदोष काल में होगा रावण दहन, जानें समय

रावण दहन का समय

द्रिक पंचांग के अनुसार, रावण के पुतला दहन (Ravan Dahan Timing) की रस्म प्रदोष काल में की जानी चाहिए, जो सूर्यास्त के बाद शुरू होता है। इस वर्ष 2 अक्टूबर को सूर्यास्त शाम 6:07 बजे होगा। इसके बाद ही रावण दहन अत्यंत शुभ माना जाएगा।

दशहरा का महत्व

दशहरा, जिसे विजयादशमी (Dussehra 2025) भी कहा जाता है, भारत के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह नवरात्रि के दसवें दिन मनाया जाता है और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस त्योहार का देश भर में गहरा सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व है। बुराई पर अच्छाई की जीत- दशहरा का मुख्य महत्व धर्म की विजय है। यह उत्सव भगवान राम की रावण पर विजय का जश्न मनाता है जो बुराई पर सत्य और धर्म की विजय का प्रतीक है। देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय, जो बुरी शक्तियों को हराने वाली अच्छी शक्तियों की शक्ति का प्रतीक है।
नवीनीकरण और नई शुरुआत-
दशहरा नई शुरुआत के लिए एक शुभ समय माना जाता है। कई लोग इस त्योहार के दौरान नए उद्यम शुरू करते हैं, व्यवसाय शुरू करते हैं या महत्वपूर्ण वस्तुएं खरीदते हैं, यह मानते हुए कि यह सफलता और समृद्धि लाता है। Dussehra 2025: कल है दशहरा, प्रदोष काल में होगा रावण दहन, जानें समय   आध्यात्मिक महत्व- यह त्योहार आत्म-चिंतन और लालच, क्रोध और अहंकार जैसी आंतरिक बुराइयों के उन्मूलन को प्रोत्साहित करता है। दशहरा भक्तों को धैर्य, ईमानदारी और करुणा जैसे गुणों को विकसित करने की याद दिलाता है।
सांस्कृतिक उत्सव-
दशहरा भारत के कई हिस्सों में रामलीला, जुलूस और रावण दहन के साथ मनाया जाता है। ये परंपराएँ न केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक हैं, बल्कि सांस्कृतिक कहानियों और नैतिक मूल्यों को भी संरक्षित करती हैं। एकता और सामाजिक सद्भाव- उत्सव समुदायों को एक साथ लाते हैं, सामाजिक बंधन, सहयोग और साझा मूल्यों के उत्सव को प्रोत्साहित करते हैं। विभिन्न पृष्ठभूमि के लोग सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में शामिल होकर सद्भाव और एकजुटता को बढ़ावा देते हैं। यह भी पढ़ें: Sharad Purnima 2025: इस दिन मनाई जाएगी शरद पूर्णिमा, जानिए महत्त्व और कैसे करें पूजा ?
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Senior Sub Editor (Feature)

Preeti Mishra is a seasoned journalist with over 12 years of rich experience in the media industry. Over the course of her career, she has worked with reputed media organizations such as DD News, Hindustan, Final Report, and Newstrack, building a strong foundation in credible and impactful journalism. She has extensively covered diverse beats including Religion, Health, Lifestyle, and Tourism, and is known for presenting complex topics in a clear, engaging, and reader-friendly manner. Her writing reflects a fine balance of authenticity, research, and public interest, making her stories both informative and relatable. Currently, She is associated with Hind First, where she is responsible for leading and curating content for the Religion, Health, Lifestyle, and Tourism sections. With her deep subject knowledge and editorial insight, she continues to deliver high-quality, meaningful content that resonates strongly with a wide audience.

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