Ram Navami 2026: इस दिन मनाई जाएगी राम नवमी, जानें इसका महत्व और पूजा मुहूर्त

राम नवमी क्यों मनाई जाती है, इसका धार्मिक महत्व क्या है, और पूरे भारत में यह त्योहार किस तरह भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाता है। आइए जानते हैं सबकुछ।

Preeti Mishra
Published on: 21 March 2026 1:01 PM IST
Ram Navami 2026: इस दिन मनाई जाएगी राम नवमी, जानें इसका महत्व और पूजा मुहूर्त
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Ram Navami 2026: राम नवमी हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है और पूरे भारत में इसे बहुत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष राम नवमी 27 मार्च को मनाई जाएगी। यह दिन भगवान विष्णु के सातवें अवतार, भगवान राम की जयंती का प्रतीक है। यह त्योहार चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन पड़ता है, जिससे भक्तों के लिए यह अवसर और भी अधिक पवित्र हो जाता है।

भगवान राम की पूजा धर्म, सत्य, कर्तव्य और आदर्श आचरण के प्रतीक के रूप में की जाती है। रामायण में वर्णित उनका जीवन, लाखों लोगों को प्रेरित करता रहता है। राम नवमी के दिन, भक्त उनके जन्म, उनके गुणों और उनकी शिक्षाओं को याद करते हैं, और शांति, शक्ति तथा समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।

राम नवमी क्यों मनाई जाती है?

राम नवमी मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के जन्म के उपलक्ष्य में मनाई जाती है, जिनका जन्म अयोध्या में राजा दशरथ और रानी कौशल्या के यहाँ हुआ था। हिंदू मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु ने बुराई को नष्ट करने, राक्षस राज रावण को हराने और पृथ्वी पर धर्म की पुनर्स्थापना करने के लिए राम का रूप धारण किया था।

यह त्योहार न केवल भगवान राम के जन्म का उत्सव है, बल्कि असत्य पर सत्य की और बुराई पर अच्छाई की जीत की याद भी दिलाता है। भगवान राम को एक आदर्श पुत्र, आदर्श राजा, आदर्श पति और एक आदर्श इंसान के रूप में देखा जाता है। यही कारण है कि उनकी जयंती इतनी गहरी श्रद्धा के साथ मनाई जाती है।

राम नवमी का धार्मिक महत्व

राम नवमी का भक्तों के लिए बहुत अधिक आध्यात्मिक महत्व है। यह दिन इन बातों का प्रतीक है:

- धर्म और सदाचार की विजय

- सत्य, कर्तव्य और करुणा का महत्व

- नकारात्मकता और बुराई से ईश्वरीय सुरक्षा

- सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उत्थान का आरंभ

चूंकि यह त्योहार चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन आता है, इसलिए कई भक्त जो नवरात्रि का व्रत रखते हैं, वे भी इसी दिन अपना व्रत पूर्ण करते हैं। इस दिन भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

कई लोगों का यह भी मानना ​​है कि राम नवमी के दिन भगवान राम की पूजा करने से घर में शांति आती है, बाधाएं दूर होती हैं, और परिवार में आपसी सौहार्द व समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पूरे भारत में राम नवमी कैसे मनाई जाती है?

राम नवमी पूरे देश में अलग-अलग तरीकों से मनाई जाती है, लेकिन हर जगह भक्ति-भाव एक जैसा ही रहता है।

मंदिर में पूजा और विशेष प्रार्थनाएँ- राम नवमी के दिन, भक्त भगवान राम को समर्पित मंदिरों में जाते हैं और विशेष पूजा-अर्चना तथा भजन-कीर्तन में हिस्सा लेते हैं। मंदिरों को फूलों और रोशनी से बहुत सुंदर ढंग से सजाया जाता है। पुजारी विधि-विधान से पूजा करते हैं और भगवान राम के सम्मान में पवित्र मंत्रों का पाठ करते हैं।

रामायण का पाठ- कई घरों और मंदिरों में, भक्त रामायण के अंशों का पाठ करते हैं, विशेष रूप से उन अध्यायों का जो भगवान राम के जन्म से जुड़े हैं। कुछ लोग रामचरितमानस का 'अखंड पाठ' भी आयोजित करते हैं, जो कई घंटों तक या पूरे दिन चलता रहता है।

व्रत और भोग- कई भक्त राम नवमी के दिन व्रत रखते हैं और केवल सात्विक भोजन ही ग्रहण करते हैं। पूजा के बाद, फल, पंजीरी, हलवा और अन्य सादे पकवानों का भोग लगाकर उसे प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।

शोभा यात्राएँ और सार्वजनिक उत्सव- कई शहरों और कस्बों में, 'शोभा यात्रा' नामक भव्य जुलूस निकाले जाते हैं। भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की मूर्तियों को सजे-धजे रथों पर विराजमान किया जाता है, और भक्त भजन गाते हुए 'जय श्री राम' के नारे लगाते हैं।

अयोध्या में उत्सव- भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या में, राम नवमी के अवसर पर विशेष रूप से भव्य उत्सव देखने को मिलते हैं। हजारों भक्त वहाँ प्रार्थना करने, सरयू नदी में पवित्र स्नान करने और मंदिरों में होने वाले अनुष्ठानों में हिस्सा लेने के लिए एकत्रित होते हैं। वहाँ का वातावरण अत्यंत आध्यात्मिक और उत्सवपूर्ण हो जाता है।

क्षेत्रीय परंपराएँ- अलग-अलग राज्यों में राम नवमी को अपने-अपने पारंपरिक तरीकों से मनाया जाता है। उत्तरी भारत में, मंदिरों में पूजा-अर्चना और रामायण का पाठ करना आम बात है। दक्षिणी भारत में, कुछ स्थानों पर इस दिन को भगवान राम और देवी सीता के दिव्य विवाह से भी जोड़ा जाता है। पूर्वी क्षेत्रों में, भक्त कीर्तन और सामूहिक पूजा-अर्चना के लिए एकत्रित होते हैं।

राम नवमी का आध्यात्मिक संदेश

राम नवमी सिर्फ़ एक त्योहार से कहीं बढ़कर है। यह भगवान राम के आदर्शों को याद करने और उन्हें अपने रोज़मर्रा के जीवन में अपनाने का दिन है। उनका जीवन लोगों को सिखाता है कि मुश्किल हालात में भी सच बोलने वाले, सब्र रखने वाले, अनुशासित और दूसरों का आदर करने वाले बनें।

ऐसे समय में जब लोग तनाव, आपसी झगड़ों और उलझनों का सामना कर रहे हैं, भगवान राम की शिक्षाएँ नैतिकता और अंदरूनी ताक़त का रास्ता दिखाती रहती हैं। राम नवमी भक्तों को सही राह चुनने और सच्चाई के प्रति समर्पित रहने की याद दिलाती है।

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Senior Sub Editor (Feature)

Preeti Mishra is a seasoned journalist with over 12 years of rich experience in the media industry. Over the course of her career, she has worked with reputed media organizations such as DD News, Hindustan, Final Report, and Newstrack, building a strong foundation in credible and impactful journalism. She has extensively covered diverse beats including Religion, Health, Lifestyle, and Tourism, and is known for presenting complex topics in a clear, engaging, and reader-friendly manner. Her writing reflects a fine balance of authenticity, research, and public interest, making her stories both informative and relatable. Currently, She is associated with Hind First, where she is responsible for leading and curating content for the Religion, Health, Lifestyle, and Tourism sections. With her deep subject knowledge and editorial insight, she continues to deliver high-quality, meaningful content that resonates strongly with a wide audience.

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