Makar Sankranti 2025: 14 या 15 जनवरी कब है मकर संक्रान्ति? जानें ज्योतिषाचार्य से

लखनऊ स्थित महर्षि पाराशर ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पं राकेश पाण्डेय बताते है कि मकर संक्रान्ति पुण्यकाल कल प्रातः 07:58 के बाद प्रारम्भ हो जाएगा।

Preeti Mishra
Published on: 13 Jan 2025 6:23 PM IST
Makar Sankranti 2025: 14 या 15 जनवरी कब है मकर संक्रान्ति? जानें ज्योतिषाचार्य से
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Makar Sankranti 2025: बीते कुछ वर्षों में ऐसा देखा गया है कि हिन्दू धर्म के त्योहारों की तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो जा रही है। ऐसा मकर संक्रांति को लेकर भी हो रहा है। लोगों में इस बात को लेकर भ्रम की स्थिति है कि मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2025) का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाए अथवा 15 जनवरी को। आज हम इस आर्टिकल में इसी भ्रम को दूर कर ज्योतिषाचार्य के माध्यम से इस बात पर प्रकाश डालेंगे कि मकर संक्रांति कब मनाई जाए।

14 जनवरी को है मकर संक्रांति

लखनऊ स्थित महर्षि पाराशर ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पं राकेश पाण्डेय बताते है कि मकर संक्रान्ति (Makar Sankranti 2025 Date) पुण्यकाल कल प्रातः 07:58 के बाद प्रारम्भ हो जाएगा। माघ कृष्ण प्रतिपदा मंगलवार 14 जनवरी को दिन में 02:58 मिनट पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे।धर्म सिंधु के अनुसार, संक्रांति के 8 घण्टे पूर्व ही पुण्य काल प्रारम्भ हो जाता है अतः 14 जनवरी को सुबह 07:58 के पश्चात मकर संक्रान्ति का पर्व मनाया जाना शुभ होगा। इस पर्व को उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखण्ड जैसे राज्यों में खिचड़ी कहते है।

                                                      ज्योतिषाचार्य पं राकेश पाण्डेय

कब होती है 15 जनवरी को मकर संक्रांति?

हिंदू धर्म में अधिकतर त्योहार चंद्र-सौर हिंदू कैलेंडर के अनुसार निर्धारित की जाती हैं। वहीं मकर संक्रांति (Makar Sankranti) को सौर कैलेंडर के अनुसार मनाया जाता है। इसलिए इंग्लिश केलिन्डर में हर साल यह 14 जनवरी को ही मनाया जाता है। हालांकि इसमें भी एक अपवाद है। हम सभी जानते हैं कि एक साल में 364 दिन और 6 घंटे होते हैं। इन 6 घंटों को हर चार साल में समायोजित कर के एक दिन बना दिया जाता है। जिस साल इस दिन को समायोजित किया जाता है उस वर्ष में दिनों की संख्या 365 हो जाती है। इसे लीप ईयर कहा जाता है। इसलिए, हर लीप वर्ष में मकर संक्रांति 15 जनवरी को पड़ती है। लीप वर्ष के कारण मकर राशि का नाक्षत्र समय भी एक दिन आगे बढ़ जाता है।

क्यों होती है संक्रांति?

12 राशियों में सूर्य के परिवर्तन काल को संक्रान्ति कहा जाता है। किसी भी संक्रान्ति के समय स्नान, दान, जप, यज्ञ का विशेष महत्व होता है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश को 'मकर संक्रान्ति 'कहते है। सूर्य का मकर रेखा से उत्तरी कर्क रेखा की ओर जाना 'उत्तरायण ' तथा कर्क रेखा से दक्षिणी रेखा की ओर जाना 'दक्षिणायन' कहलाता है। उत्तरायण में दिन बड़ें हो जाते है। प्रकाश बढ़ जाता है।रातें दिन की अपेक्षा छोटी होने लगती है। दक्षिणायन में इसके ठीक विपरीत होता है।
शास्त्रों के अनुसार, उत्तरायण की अवधि देवताओं का दिन तथा दक्षिणायन की अवधि देवताओं की रात्रि है। वैदिक काल में उत्तरायण को "देवयान" तथा दक्षिणायन को "पितृयान" कहा जाता है। मकर संक्रान्ति के दिन यज्ञ में दिए गए द्रव्य को ग्रहण करने के लिए देवता पृथ्वी पर अवतरित होते हैं। इसी मार्ग से पुण्यात्मायें शरीर छोड़कर स्वर्ग लोक में प्रवेश करतीं है। इसलिए यह आलोक का अवसर माना जाता है।

मकर संक्रांति के दिन दान और तिल का है विशेष महत्व

धर्मशास्त्रों के कथनानुसार, इस दिन पुण्य, दान, जप तथा धार्मिक अनुष्ठानों का अत्यन्त महत्व है। इस अवसर पर किया गया दान पुनर्जन्म होने पर सौ गुना होकर प्राप्त होता है। इस पर्व पर तिल का विशेष महत्व है। तिल खाना तथा तिल बाँटना इस पर्व की प्रधानता है। ठण्ड से बचने के लिए भी तिल, तेल तथा तूल का महत्व है ! तिल मिश्रित जल से स्नान, तिल-उबटन, तिल-हवन, तिल-भोजन तथा तिल-दान सभी कार्य पापनाशक है। इसलिए इस दिन तिल, गुड तथा चीनी मिले लड्डू खाने और दान देने का विशेष महत्व है। मकर संक्रान्ति से एक दिन पूर्व हिमाचल, हरियाणा तथा पंजाब में यह त्योहार लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश में यह मकर संक्रान्ति, खिचड़ी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन खिचड़ी खाने और खिचड़ी -तिल के दान का विशेष महत्व है। इस अवसर पर गंगा सागर में बहुत बड़ा मेला लगता है। मकर संक्रान्ति का पर्व श्रद्धापूर्वक मनाने से सामाजिक एकता और अनन्त पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

मकर संक्रांति में जाने क्या है राशियों का फल?

ज्योतिषाचार्य राकेश पाण्डेय बताते है कि मकर राशि पर सूर्य का प्रवेश 14 जनवरी, दिन मंगलवार को दिन 02:58 पर हो रहा है। उस समय वृष लग्न भोग करेगी अतः वृष राशि वालों के लिए यह संक्रान्ति अत्यंत लाभकारी होगी। मकर व कुम्भ राशि वालों के रुके हुए कार्य त्वरित होने लगेंगे। मेष व वृश्चिक राशि के लोगो को भूमि का सुख प्राप्त हो सकता है। वृष व तुला राशि के लोगो को वाहन व भवन का योग। मिथुन व कन्या राशि के लोगो के लिए धन लाभ। कर्क राशि के लोगो के लिए व्यापार में लाभ व रुके हुए कार्य होंगे। सिंह राशि के लोगो के लिए वाहन सुख की प्राप्ति व राजनैतिक लाभ। धनु व मीन राशि के लोगो के लिए पद व प्रतिष्ठा की प्राप्ति। यह भी पढ़े: Pongal 2025: चार-दिवसीय पोंगल पर्व आज से शुरू, थाई पोंगल माना जाता है मुख्य दिन
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Senior Sub Editor (Feature)

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