Mahashivratri 2026: इस बार महाशिवरात्रि पर कब किया जाएगा जलाभिषेक? जानें शुभ समय

महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती विवाह के बंधन में बंधे थे। इस दिन भोर से ही शिव मंदिरों में जलाभिषेक के लिए भक्तों का ताँता उमड़ पड़ता है।

Preeti Mishra
Published on: 7 Feb 2026 11:29 AM IST
Mahashivratri 2026: इस बार महाशिवरात्रि पर कब किया जाएगा जलाभिषेक? जानें शुभ समय
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Mahashivratri 2026

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है, जिसे पूरे भारत में अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, शिवलिंग पर दूध, जल, बेल के पत्ते और फल अर्पित करते हैं और "ॐ नमः शिवाय" का जाप करते हैं।

महाशिवरात्रि पर रात्रिकालीन पूजा का विशेष महत्व है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इसी रात भगवान शिव ने सृष्टि और संहार का ब्रह्मांडीय नृत्य किया था। महाशिवरात्रि अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है और भक्तों को सत्य, भक्ति और आत्मज्ञान के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है।

महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती विवाह के बंधन में बंधे थे। इस दिन भोर से ही शिव मंदिरों में जलाभिषेक के लिए भक्तों का ताँता उमड़ पड़ता है। महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक का बहुत ही ज्यादा महत्व होता है। आइये जानते हैं कब है महाशिवरात्रि और इस दिन जलाभिषेक के लिए शुभ समय क्या है।

कब है महाशिवरात्रि?

इस वर्ष फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 15 फरवरी को शाम 05:04 मिनट पर हो रही है और इसका समापन 16 फरवरी को शाम 05:34 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, इस साल महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा।

महाशिवरात्रि को जलाभिषेक का शुभ समय

इस वर्ष महाशिवरात्रि के दिन भगवान शंकर के जलाभिषेक के लिए कई मुहूर्त हैं।

सामान्य मुहूर्त सुबह 08:24 मिनट से 09:48 मिनट तक

लाभ-उन्नति मुहूर्त सुबह 09:48 मिनट से 11:11 मिनट तक

अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 11:11 मिनट से दोपहर 12:35 मिनट तक

शाम को शुभ-उत्तम मुहूर्त 06:11 मिनट से 07:47 मिनट तक

महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक का महत्व

महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक करना भगवान शिव की पूजा में गहरा आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व रखता है। शिवलिंग पर जल अर्पित करना आत्मा की शुद्धि और ईश्वर के प्रति समर्पण का प्रतीक है। मान्यता है कि भगवान शिव ने सागर मंथन के दौरान ब्रह्मांड को बचाने के लिए विष का सेवन किया था, और जलाभिषेक उनके गले को शीतलता प्रदान करता है, जो भक्ति और कृतज्ञता को दर्शाता है। जल जीवन, शांति और पवित्रता का भी प्रतीक है। महाशिवरात्रि पर गंगाजल, दूध या सादे जल से जलाभिषेक करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, मनोकामनाएं पूरी होती हैं और स्वास्थ्य, समृद्धि और आध्यात्मिक विकास का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

Preeti Mishra

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Senior Sub Editor (Feature)

Preeti Mishra is a seasoned journalist with over 12 years of rich experience in the media industry. Over the course of her career, she has worked with reputed media organizations such as DD News, Hindustan, Final Report, and Newstrack, building a strong foundation in credible and impactful journalism. She has extensively covered diverse beats including Religion, Health, Lifestyle, and Tourism, and is known for presenting complex topics in a clear, engaging, and reader-friendly manner. Her writing reflects a fine balance of authenticity, research, and public interest, making her stories both informative and relatable. Currently, She is associated with Hind First, where she is responsible for leading and curating content for the Religion, Health, Lifestyle, and Tourism sections. With her deep subject knowledge and editorial insight, she continues to deliver high-quality, meaningful content that resonates strongly with a wide audience.

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