Mahakal Ujjain: होली का पहला गुलाल महादेव को यहाँ करते हैं अर्पित, जानिए इससे जुड़ी परंपरा

रंगों से सड़कें भर जाने से पहले, होली का पहला गुलाल भगवान शिव को अर्पित किया जाता है, जिन्हें यहां महाकाल के रूप में पूजा जाता है।

Preeti Mishra
Published on: 16 Feb 2026 1:35 PM IST
Mahakal Ujjain: होली का पहला गुलाल महादेव को यहाँ करते हैं अर्पित, जानिए इससे जुड़ी परंपरा
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Mahakal Ujjain: होली का त्योहार पूरे भारत में रंगों, उल्लास और भक्ति के साथ मनाया जाता है, लेकिन महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में उत्सव की शुरुआत एक गहरे आध्यात्मिक तरीके से होती है। रंगों से सड़कें भर जाने से पहले, होली का पहला गुलाल भगवान शिव को अर्पित किया जाता है, जिन्हें यहां महाकाल के रूप में पूजा जाता है। यह अनूठी परंपरा इस मान्यता को दर्शाती है कि कोई भी शुभ उत्सव दैवीय आशीर्वाद प्राप्त किए बिना शुरू नहीं होता।

हर साल, हजारों भक्त उज्जैन में इस पवित्र अनुष्ठान को देखने और इसमें भाग लेने के लिए एकत्रित होते हैं, जो भक्ति, संस्कृति और प्राचीन परंपरा का संगम है।

महादेव को पहला गुलाल क्यों अर्पित किया जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव सर्वोच्च रक्षक और नकारात्मकता के नाशकर्ता हैं। महाकाल को पहला गुलाल अर्पित करना उत्सव से पहले दैवीय आशीर्वाद प्राप्त करने, मन और वातावरण का शुद्धिकरण, खुशी और सकारात्मकता का स्वागत और रंगों के माध्यम से भक्ति व्यक्त करने का प्रतीक है। भक्तों का मानना ​​है कि महादेव के आशीर्वाद से होली की शुरुआत करने से सुख, समृद्धि और बुरी शक्तियों से सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

यह अनुष्ठान कब और कैसे होता है?

यह अनुष्ठान होलिका दहन के समय के आसपास किया जाता है और होली के उत्सव के दौरान जारी रहता है। इस मंदिर के पुजारी भगवान महाकाल की विशेष पूजा और अभिषेक करते हैं। चंदन और पवित्र भोगों से युक्त गुलाल देवता को अर्पित किया जाता है। भक्त “हर हर महादेव” और भक्ति भजन गाते हैं। देवता को गुलाल अर्पित करने के बाद, भक्त इस पवित्र रंग को अपने माथे पर लगाते हैं। इस अनुष्ठान के बाद ही शहर में होली का उत्सव शुरू होता है। यह क्रम इस बात का प्रतीक है कि आनंद की शुरुआत भक्ति से होती है।

भस्म आरती और होली उत्सव से संबंध

महाकाल मंदिर की प्रसिद्ध भस्म आरती होली के दौरान विशेष महत्व रखती है। उत्सव के दौरान मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है। भक्ति संगीत और भजन वातावरण को भर देते हैं। मंदिर परिसर के अंदर होली के रंग खेल-खेल में नहीं बल्कि विधिपूर्वक अर्पित किए जाते हैं। आध्यात्मिक अनुष्ठानों और उत्सव के उत्साह का संयोजन एक ऐसा दिव्य वातावरण बनाता है जो कहीं और नहीं मिलता।

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का धार्मिक महत्व

महाकालेश्वर भगवान शिव के बारह पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसका आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है।

महाकाल से जुड़ी मान्यताएं:

भगवान शिव यहां समय के स्वामी (महाकाल) के रूप में विराजमान हैं।

भक्तों को अकाल मृत्यु से सुरक्षा प्राप्त होती है।

ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव कम होता है।

यहां पूजा करने से भय और बाधाएं दूर होती हैं।

होली के दौरान गुलाल चढ़ाना अहंकार का त्याग करने और दिव्य आनंद को ग्रहण करने का प्रतीक है।

उज्जैन में होली का उत्सव: एक आध्यात्मिक अनुभव

उज्जैन में होली सिर्फ रंगों का उत्सव नहीं है—यह एक पवित्र उत्सव है। इस होली की अनूठी विशेषताओं में मंदिर केंद्रित होली की रस्में, आध्यात्मिक मंत्रोच्चार और भजन, भक्तों द्वारा प्रसाद के रूप में गुलाल लगाना, सांस्कृतिक जुलूस और भक्तिमय सभाएँ और आध्यात्मिकता और उत्सव का दिव्य संगम शामिल है। होली के इस पवित्र आरंभ को देखने के लिए भारत भर से तीर्थयात्री विशेष रूप से उज्जैन आते हैं।

शिव को रंग अर्पित करने का आध्यात्मिक महत्व

रंग विभिन्न आध्यात्मिक ऊर्जाओं का प्रतीक हैं:

लाल/गुलाबी गुलाल – प्रेम, भक्ति और ऊर्जा

पीला – पवित्रता और ज्ञान

हरा – विकास और सामंजस्य

नारंगी – आध्यात्मिक जागृति

महादेव को ये रंग अर्पित करना भावनाओं के समर्पण और दिव्य सृष्टि का उत्सव मनाने का प्रतीक है।

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Senior Sub Editor (Feature)

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