Kumbha Sankranti 2026: जानें इस दिन का महत्व, अनुष्ठान और क्या करें, क्या ना करें
कुंभ संक्रांति क्रूर, पापी, भ्रष्ट लोगों और अपराधियों के लिए यह अच्छी है। वस्तुओं की लागत सामान्य होगी।
Kumbha Sankranti 2026
Kumbha Sankranti 2026: कुंभ संक्रांति एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है जो सूर्य के कुंभ राशि में प्रवेश का प्रतीक है। यह आमतौर पर फरवरी में पड़ता है और धार्मिक गतिविधियों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन, भक्त पवित्र नदियों, विशेषकर गंगा में स्नान करके अपने पापों को धोते हैं और आध्यात्मिक शुद्धता प्राप्त करते हैं।
दान, चंदा और भगवान विष्णु तथा सूर्य देव की पूजा से समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। कुंभ मेले के दौरान कुंभ संक्रांति का विशेष महत्व होता है, जिससे यह आध्यात्मिक विकास और भक्ति का पवित्र दिन बन जाता है।
कब है कुंभ संक्रांति?
कुंभ संक्रांति शुक्रवार, फरवरी 13, 2026 को होगी।
कुंभ संक्रांति पुण्य काल - सुबह 06:44 से दोपहर 12:21 बजे तक
कुंभ संक्रांति महा पुण्य काल - सुबह 06:44 से 08:36 बजे तक
कैसा रहेगा कुंभ संक्रांति का प्रभाव
कुंभ संक्रांति क्रूर, पापी, भ्रष्ट लोगों और अपराधियों के लिए यह अच्छी है। वस्तुओं की लागत सामान्य होगी। कुंभ संक्रांति भय और चिन्ता लाती है। लोगों को स्वास्थ्य लाभ होगा, राष्ट्रों के बीच सम्बन्ध मधुर होंगे और अनाज भण्डारण में वृद्धि होगी।
कुंभ संक्रांति का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व
विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन कुंभ मेले से जुड़ा हुआ है कुंभ संक्रांति। गंगा, यमुना, गोदावरी और शिप्रा जैसी नदियों में स्नान के लिए इसे सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस दौरान स्नान करने से पाप धुल जाते हैं और मोक्ष प्राप्त होता है।
कुंभ संक्रांति के क्षेत्रीय रीति-रिवाज
पूर्वी भारत: इसे बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में, जहाँ यह फाल्गुन मास की शुरुआत का प्रतीक है
केरल: मलयालम पंचांग में मासी मास की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है
तीर्थ नगर: प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में अनुष्ठानिक स्नान और मंदिर पूजा के लिए भारी संख्या में लोग एकत्रित होते हैं
कुंभ संक्रांति के अनुष्ठान
स्नान: गंगा या यमुना, गोदावरी, शिप्रा जैसी अन्य पवित्र नदियों में
दान: ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और आवश्यक वस्तुएँ दान करना
गौदान: गायों को दान करना अत्यंत पुण्य का कार्य माना जाता है
गंगा पूजा: भक्त प्रार्थना करते हैं समृद्धि और शांति के लिए देवी गंगा का ध्यान करें।
मंदिर दर्शन: नदी तटों पर स्थित मंदिर विशेष पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों से भरे रहते हैं।


