आज है रंगों का पर्व होली, मस्ती के सराबोर में डूब लोग लगाएंगे एक दूसरे को गले

आज पूरे देश में होली का पर्व मनाया जाएगा। लोग आज के दिन रंगों में सराबोर होकर एक दूसरे को गले लगाएंगे।

Preeti Mishra
Published on: 14 March 2025 6:00 AM IST
आज है रंगों का पर्व होली, मस्ती के सराबोर में डूब लोग लगाएंगे एक दूसरे को गले
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Holi 2025 Celebration: आज पूरे देश में होली का पर्व मनाया जाएगा। लोग आज के दिन रंगों में सराबोर होकर एक दूसरे को गले लगाएंगे। होली के अवसर पर पूरे देश में आज उत्सव का माहौल होगा। लोग रंगों, संगीत और पारंपरिक उत्सवों के साथ जश्न मनाने के लिए एक साथ आएंगे। घरों (Holi 2025 Celebration) से लेकर सड़कों तक, लोग रंगों में डूब कर एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगाएंगे। रंगों और खुशियों का त्योहार होली (Holi 2025 Celebration) आज पूरे भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह खुशी का अवसर बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और वसंत के आगमन का प्रतीक है। सभी उम्र के लोग रंगों से खेलने, उत्सव के संगीत पर नाचने और स्वादिष्ट मिठाइयाँ बाँटने के लिए एक साथ आते हैं।

होली की परंपरा कैसे हुई शुरू?

होली (How Holi Started) की जड़ें हिंदू पौराणिक कथाओं में गहराई से निहित हैं, जो मुख्य रूप से प्रह्लाद और होलिका की कथा से जुड़ी हैं। कहानी के अनुसार, राक्षस राजा हिरण्यकश्यप अपने बेटे प्रह्लाद को मारना चाहता था, जो भगवान विष्णु का भक्त था। उसकी बहन होलिका, जिसे आग से अछूता रहने का वरदान प्राप्त था, प्रह्लाद के साथ आग की लपटों में बैठ गई। हालाँकि, उसकी शक्तियां विफल हो गईं और वह जल गई जबकि प्रह्लाद अपनी भक्ति के कारण अछूता रहा। यह घटना अहंकार और बुराई पर विश्वास और अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जिसे होली से एक रात पहले होलिका दहन के रूप में मनाया जाता है। होली से जुड़ी एक और लोकप्रिय कथा राधा और कृष्ण की है। अपने शरारती स्वभाव के लिए जाने जाने वाले भगवान कृष्ण ने राधा और अन्य गोपियों पर रंग डाला, जिससे रंगों से खेलने की परंपरा शुरू हुई।

होली का महत्व

होली (Holi Significance) सिर्फ़ रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह एकता, क्षमा और नई शुरुआत का भी पर्व है। यह जाति, वर्ग और सामाजिक मतभेदों की बाधाओं को तोड़ता है, क्योंकि लोग एक-दूसरे को प्यार और रंगों से बधाई देते हैं। यह त्योहार वसंत के आगमन का भी प्रतीक है, जो नई ऊर्जा और खुशियां लेकर आता है। ऐसा माना जाता है कि गुलाल से खेलना और पानी में भीगना नकारात्मकता को धो देता है और सकारात्मकता का स्वागत करता है।

पूरे भारत में होली कैसे मनाई जाती है

होलिका दहन (छोटी होली)- होली से एक रात पहले होलिका दहन के साथ त्योहार की शुरुआत होती है। लोग बड़े-बड़े अलाव जलाते हैं, अनुष्ठान करते हैं और समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं। रंगवाली होली- अगले दिन, जिसे रंगवाली होली के नाम से जाना जाता है, उत्साह से भरा होता है क्योंकि लोग एक-दूसरे पर गुलाल (रंगीन पाउडर) फेंकते हैं और रंगीन पानी छिड़कते हैं। विशेष मिठाइयां और ड्रिंक्स- लोग गुजिया, मालपुआ, ठंडाई और भांग जैसे पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लेते हैं, जो उत्सव में और भी स्वाद जोड़ते हैं।

होली के क्षेत्रीय रूप

लट्ठमार होली (बरसाना और नंदगांव, यूपी): महिलाएं पुरुषों को लाठियों से पीटती हैं। फूलों की होली (वृंदावन): रंगों की जगह फूलों से होली खेली जाती है। शांतिनिकेतन होली (पश्चिम बंगाल): बसंत उत्सव के रूप में जाना जाने वाला यह त्यौहार संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मनाया जाता है। मसान होली (वाराणसी): श्मशान घाट के पास होली खेली जाती है, जो जीवन और मृत्यु की स्वीकृति का प्रतीक है। यह भी पढ़ें: Happy Holi 2025: होली पर अपनों को भेजें ये शुभकामना संदेश, खास बनाएं उनका दिन
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Senior Sub Editor (Feature)

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