Holashtak 2026: इस दिन से शुरु हो रहा है होलाष्टक, जानिए क्यों वर्जित हो जाते हैं इसमें शुभ काम

इस वर्ष होलाष्टक मंगलवार, 24 फरवरी को होली से आठ दिन पहले, फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से शुरू होकर फाल्गुन पूर्णिमा (होली) को समाप्त होगा।

Preeti Mishra
Published on: 9 Feb 2026 12:20 PM IST
Holashtak 2026: इस दिन से शुरु हो रहा है होलाष्टक, जानिए क्यों वर्जित हो जाते हैं इसमें शुभ काम
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Holashtak 2026: हिंदू पंचांग में होलाष्टक को अत्यंत संवेदनशील और आध्यात्मिक रूप से गहन काल माना जाता है। इस वर्ष होलाष्टक मंगलवार, 24 फरवरी को होली से आठ दिन पहले, फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से शुरू होकर फाल्गुन पूर्णिमा (होली) को समाप्त होगा।

होलाष्टक के दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण और नए व्यवसाय शुरू करने जैसे सभी शुभ कार्यों से बचना आवश्यक माना जाता है। यह मान्यता हिंदू शास्त्रों, ज्योतिष और पौराणिक कथाओं में गहराई से निहित है। आइए समझते हैं कि होलाष्टक के दौरान शुभ कार्यों की मनाही क्यों है और इसके बजाय क्या करना चाहिए।


होलाष्टक क्या है?

होलाष्टक शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है होली - रंगों का त्योहार और अष्टक - आठ दिन। होलाष्टक होली से पहले के आठ दिनों को संदर्भित करता है, जिन्हें ज्योतिषीय रूप से अस्थिर माना जाता है। इस दौरान नकारात्मक ग्रहीय ऊर्जाओं का प्रभुत्व माना जाता है, जिससे यह किसी भी नई चीज की शुरुआत के लिए प्रतिकूल समय होता है।

होलाष्टक 2026: तिथि और अवधि

प्रारंभ तिथि: मंगलवार, 24 फरवरी, 2026

समाप्ति तिथि: मंगलवार, 3 मार्च, 2026 (होली)

ये आठ दिन होलिका दहन के साथ समाप्त होते हैं, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।


होलाष्टक के दौरान शुभ कार्यों का निषेध क्यों है?

ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव

ज्योतिष के अनुसार, होलाष्टक के दौरान सभी नौ ग्रह (नवग्रह) प्रतिकूल स्थिति में माने जाते हैं। उनकी ऊर्जा अस्थिर हो जाती है, जिसका विवाह, रिश्तों और नई शुरुआत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इस दौरान शुरू किए गए किसी भी शुभ कार्य में देरी, बाधाएं या असफलता आने की आशंका रहती है।

प्रहलाद-होलिका कथा से संबंध

होलाष्टक का संबंध राक्षस राजा हिरण्यकशिपु के हाथों प्रहलाद के अंतिम दिनों से है। इन आठ दिनों के दौरान, प्रहलाद को अनेक प्रकार की यातनाएँ दी गईं, लेकिन भगवान विष्णु के प्रति उनकी भक्ति ने उनकी रक्षा की। चूंकि ये दिन पीड़ा, परीक्षाओं और नकारात्मक शक्तियों का प्रतीक हैं, इसलिए इन्हें आनंदमय समारोहों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है।

तामसिक ऊर्जा का प्रभाव

आध्यात्मिक रूप से, होलाष्टक को तामसिक (भारी और नकारात्मक) ऊर्जा से प्रभावित माना जाता है। यह ऊर्जा शुभ और पवित्र अनुष्ठानों के लिए अनुपयुक्त है, जिनमें सकारात्मकता और पवित्रता की आवश्यकता होती है। इसलिए, भविष्य की खुशियों पर नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए विवाह और उत्सवों से परहेज किया जाता है।

ज्योतिषीय अस्थिरता

ज्योतिषियों का मानना ​​है कि होलाष्टक के दौरान ग्रहों की गोचर से मुहूर्त की गणना में अस्थिरता आती है। यही कारण है कि इन आठ दिनों में कोई शुभ मुहूर्त नहीं बनता, जिससे ये दिन धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अनुपयुक्त हो जाते हैं।

होलाष्टक के दौरान कौन से कार्य वर्जित हैं?

विवाह और सगाई समारोह

गृह प्रवेश

मुंडन

नामकरण

नया व्यवसाय या निवेश शुरू करना

संपत्ति या वाहन खरीदना

भारत के कई हिस्सों में इन प्रतिबंधों का कड़ाई से पालन किया जाता है।

होलाष्टक के दौरान क्या करना चाहिए?

हालांकि शुभ कार्यों का निषेध है, होलाष्टक आध्यात्मिक साधनाओं के लिए आदर्श समय है। इस दौरान विष्णु या नरसिम्हा मंत्रों का जाप करें। प्रहलाद कथा पढ़ें। होलिका दहन की तैयारी करें। होलाष्टक के दौरान जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या धन दान करना लाभकारी माना जाता है और इससे नकारात्मक कर्म कम होते हैं। साथ ही संयम बरतना, क्रोध, झूठ, शराब और मांसाहारी भोजन से परहेज करना उचित है। इससे मन और आत्मा की शुद्धि होती है।


होलाष्टक का आध्यात्मिक महत्व

होलाष्टक धैर्य, विश्वास और सहनशीलता सिखाता है। जिस प्रकार प्रहलाद कष्ट सहते हुए भी अपनी भक्ति में दृढ़ रहे, उसी प्रकार भक्तों को इस अवधि का उपयोग आत्म-शुद्धि और आत्मचिंतन के लिए करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। होलाष्टक के अंत में होलिका दहन नकारात्मकता के नाश और होली के साथ सकारात्मकता और आनंद के आरंभ का प्रतीक है।

क्या होलाष्टक हर जगह मनाया जाता है?

उत्तर भारत में होलाष्टक व्यापक रूप से मनाया जाता है, जबकि दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों में इसका कड़ाई से पालन नहीं किया जाता है। हालांकि, ज्योतिषीय रूप से, इस दौरान कई लोग शुभ कार्यों से परहेज करते हैं।


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Senior Sub Editor (Feature)

Preeti Mishra is a seasoned journalist with over 12 years of rich experience in the media industry. Over the course of her career, she has worked with reputed media organizations such as DD News, Hindustan, Final Report, and Newstrack, building a strong foundation in credible and impactful journalism. She has extensively covered diverse beats including Religion, Health, Lifestyle, and Tourism, and is known for presenting complex topics in a clear, engaging, and reader-friendly manner. Her writing reflects a fine balance of authenticity, research, and public interest, making her stories both informative and relatable. Currently, She is associated with Hind First, where she is responsible for leading and curating content for the Religion, Health, Lifestyle, and Tourism sections. With her deep subject knowledge and editorial insight, she continues to deliver high-quality, meaningful content that resonates strongly with a wide audience.

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