Magh Mela Snan 2026: माघी पूर्णिमा के दिन होगा पांचवां मुख्य स्नान, जानें तिथि और महत्व
Magh Mela Snan 2026: प्रयागराज में इस समय माघ मेला चल रहा है। माघ मेला सबसे पवित्र हिंदू मेलों में से एक है, जो हर साल प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम पर लगता है। यह आध्यात्मिक आयोजन लाखों भक्तों को आकर्षित करता है, जिनका मानना है कि माघ महीने में पवित्र नदियों में स्नान करने से पाप धुल जाते हैं और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
इस वर्ष माघ मेले का पाँचवाँ मुख्य स्नान माघी पूर्णिमा के दिन 1 फरवरी को होगा। इस दिन का बहुत धार्मिक महत्व है, क्योंकि यह माघ महीने की तपस्या और दान-पुण्य के कामों का समापन होता है।
माघी पूर्णिमा स्नान इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, माघी पूर्णिमा को साल की सबसे शुभ पूर्णिमा माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सभी देवता पवित्र नदियों में आते हैं, जिससे स्नान करना बहुत फलदायी होता है। कहा जाता है कि जो भक्त माघी पूर्णिमा पर स्नान करते हैं, उन्हें कई यज्ञ करने के बराबर पुण्य मिलता है।
माघ मेले का पाँचवाँ स्नान इसलिए भी खास है क्योंकि यह संतों और भक्तों द्वारा महीने भर चलने वाले कल्पवास, उपवास, दान और आध्यात्मिक अनुशासन का समापन होता है।
पांचवें स्नान का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
कई भक्त पौष पूर्णिमा से माघी पूर्णिमा तक कल्पवास करते हैं। इस दिन पवित्र स्नान करने से उनकी आध्यात्मिक यात्रा सफलतापूर्वक पूरी होती है, जिससे यह बहुत फलदायी होता है। शास्त्रों के अनुसार, माघी पूर्णिमा पर संगम में स्नान करने से पिछले पाप नष्ट होते हैं और आत्मा को शांति मिलती है।
माघी पूर्णिमा भगवान विष्णु को विशेष रूप से प्रिय है। इस दिन पूजा, स्नान और दान करने से समृद्धि, अच्छा स्वास्थ्य और दिव्य सुरक्षा मिलती है। पवित्र स्नान के बाद भोजन, कपड़े, कंबल, अनाज, घी और पैसे दान करना बहुत शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि माघी पूर्णिमा पर किया गया दान अनंत पुण्य देता है।
माघी पूर्णिमा पर माघ मेले में किए जाने वाले अनुष्ठान
- संगम में ब्रह्म मुहूर्त स्नान
- गंगा माँ और भगवान विष्णु की पूजा
- पूर्वजों के लिए पिंडदान और तर्पण
- संतों, ब्राह्मणों और ज़रूरतमंदों को दान
- धार्मिक प्रवचन और भजन सुनना
- भक्त पूरे दिन विचारों, भोजन और कर्मों में पवित्रता बनाए रखते हैं।
लाखों लोग पाँचवें स्नान के लिए क्यों होंगे इकट्ठा?
माघी पूर्णिमा पर पाँचवें स्नान में तीर्थयात्रियों, संतों, अखाड़ों और कल्पवासी भक्तों की भारी भीड़ होती है। ऐसा माना जाता है कि इस स्नान को न करने से माघ व्रत अधूरा रह जाता है, इसीलिए पूरे भारत से भक्त ठंड के बावजूद प्रयागराज आते हैं।


