अमरेली के राजुला में जल सम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल हुए शामिल
Jal Shakti Minister CR Patil: अमरेली जिले के राजुला में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की विशेष उपस्थिति में श्री गिरगंगा परिवार ट्रस्ट राजकोट और राजुला तालुका कृषि सेवा सहकारी
Jal Shakti Minister CR Patil: अमरेली जिले के राजुला में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की विशेष उपस्थिति में श्री गिरगंगा परिवार ट्रस्ट राजकोट और राजुला तालुका कृषि सेवा सहकारी मंडली - राजुला की संयुक्त पहल के रूप में एक जल सम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संबोधित करते हुए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि ''यदि कोई व्यक्ति निर्वाचित होता है, तो वह विधायक बन जाता है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति भारतीय जनता पार्टी से निर्वाचित होता है, तो वह कार्यकर्ता बन जाता है। भाजपा और अन्य दलों में यही बड़ा अंतर है।''
पहले 100 या 200 फीट पानी होता था
देश में 4 हजार बीसीएम वर्षा होती है जबकि आवश्यकता 1120 बीसीएम है। जल भंडारण के लिए जो काम होना चाहिए था, वह इतने वर्षों में नहीं हुआ, जिसके कारण 6600 बांधों के साथ केवल 750 बीसीएम जल भंडारण प्रणाली ही उपलब्ध है। शेष 370 बीसीएम जल हम भूमिगत स्रोतों से प्राप्त करते हैं। अगर किसी आम आदमी के पास पैसा होता है, तो वह उसे बैंक में जमा करता है, सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) करवाता है और ब्याज मिलने पर उसका इस्तेमाल करता है, ठीक उसी तरह हम जमीन से निकलने वाले पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। हम अगली पीढ़ी के लिए जमीन में पानी जमा नहीं कर रहे हैं। जहां पहले 100 या 200 फीट पानी होता था, आज वह जमीन में 700 से 1200 फीट गहराई में चला गया है।
जल संरक्षण जनभागीदारी से संभव
देश के आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्रभाई मोदी ने एक वर्चुअल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जल संरक्षण को जनभागीदारी के साथ एक जन आंदोलन में परिवर्तित किया जाना चाहिए। गुजरात और पूरे देश की जनता ने इसका समर्थन किया और इस आह्वान को स्वीकार करते हुए लगभग 40 लाख संरचनाओं का निर्माण जनता ने अपने खर्च पर किया। ये सभी कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान के कारण ही संभव हो पाए। मोदी जी ने काम कर्मभूमि से मातृभूमि के लिए काम करने का आह्वान किया।
जल संरक्षण के लिए 32 हजार करोड़ रुपये आवंटित
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने आगे कहा कि जब वे 10 साल बाद मुंबई गए, तो पूरा मुंबई बदल चुका था। दिनेशभाई लखानी ने अमरेली और उसके तालुकों में 50 हजार से अधिक जलसंचय के स्ट्रक्चर बनाने का संकल्प लिया है। सौराष्ट्र का कोई भी व्यक्ति जलसंचय के काम में ना बोले ऐसा संभव ही नहीं है। गुजरातियों की खासियत यह है कि जब वे हाथ फैलाते है तो, तो सिर्फ देने के लिए, मांगने के लिए नहीं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर जिले में 75 झीलें बनवाई थीं। लोगों द्वारा अपने खर्च पर इन झीलों का निर्माण करने के बाद, प्रधानमंत्री ने कृषि मंत्री को निर्देश दिया कि वे MANREGA निधि का 65 प्रतिशत हिस्सा पिछड़े क्षेत्रों में, 40 प्रतिशत अर्ध-पिछड़े क्षेत्रों में और 25 प्रतिशत सामान्य जिलों में जल संरक्षण के लिए खर्च करें। देश भर में जल संरक्षण के लिए 32 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
धरती माता से जो जल लिया है, वह हमारा कर्ज है
देश के आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्रभाई मोदी साहब न केवल किसानों की आय दोगुनी करने की बात कर रहे हैं, बल्कि उससे आगे बढ़कर पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं। मोदी जी ने भविष्य और आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्याप्त जल सुनिश्चित करने का प्रयास शुरू कर दिया है। हमने धरती माता से जो जल लिया है, वह हमारा कर्ज है और हमें वह चुकाना ही होगा। यदि हम जल संरक्षण नहीं करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी।
कार्यक्रम में शामिल हुए कई पदाधिकारी
इस कार्यक्रम में मंत्री कौशिकभाई वेकारिया, सांसद भरतभाई सुतरिया, IFFCO के अध्यक्ष दिलीपभाई संघानी, विधायक महेशभाई कसवाला, विधायक हीराभाई सोलंकी, विधायक जे.वी. काकड़िया, अमरीशभाई डेर, जिला अध्यक्ष अतुलभाई कनानी, मार्केटिंग यार्ड के अध्यक्ष राजूभाई परसाना, क्रय एवं विक्रय संघ के अध्यक्ष रमेशभाई डोबरिया, टपूभाई राम, विजयभाई कोटिला, दिलीपभाई सुखिया सहित प्रदेश/जिले के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।


