EC अरुण गोयल के इस्तीफा पर कांग्रेस हमलावर, कहा- संस्थाओं का विनाश नहीं रुका तो हावी...

Prashant Dixit
Published on: 10 March 2024 10:17 AM IST
EC अरुण गोयल के इस्तीफा पर कांग्रेस हमलावर, कहा- संस्थाओं का विनाश नहीं रुका तो हावी...
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EC: देश के चुनाव आयुक्त (EC) अरुण गोयल के इस्तीफे पर कांग्रेस ने चिंता जाताई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक्स पर लिखा स्वतंत्र संस्थानों का व्यवस्थित विनाश नहीं रोका गया तो तानाशाही द्वारा लोकतंत्र पर कब्जा कर लिया जाएगा, भारत में एक चुनाव आयुक्त है, वह भी तब जब कुछ ही दिनों में लोकसभा चुनावों की घोषणा होनी है। अगर स्वतंत्र संस्थानों के व्यवस्थित विनाश को नहीं रोकते तो हमारे लोकतंत्र पर तानाशाही हावी हो जाएगा।
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ईसी में केवल एक सदस्य ही बचा
चुनाव आयुक्त (EC) अरुण गोयल ने लोकसभा चुनाव से पहले इस्तीफा दे दिया है। उनका कार्यकाल 5 दिसंबर 2027 तक था। वह अगले साल फरवरी में देश के मुख्य चुनाव आयुक्त बन जाते। वहीं कानून मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार अरुण गोयल का इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को स्वीकार कर लिया है। वह पंजाब कैडर 1985 बैच के आईएएस अधिकारी थे। अनूप चंद्र पांडे की सेवानिवृत्ति और गोयल के इस्तीफे के बाद, तीन सदस्यीय ईसी में केवल एक सदस्य ही बचा है।
मल्लिकार्जुन खरगे का एक्स
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक्स पर लिखा चुनाव आयोग या चुनाव चूक? भारत में अब केवल एक चुनाव आयुक्त है, जबकि कुछ ही दिनों में लोकसभा चुनावों की घोषणा होनी है। क्यों? जैसा कि मैंने पहले कहा है, यदि हम अपने स्वतंत्र संस्थानों के व्यवस्थित विनाश को नहीं रोकते हैं, तो तानाशाही द्वारा हमारे लोकतंत्र पर कब्ज़ा कर लिया जाएगा! ईसीआई अब गिरने वाली अंतिम संवैधानिक संस्थाओं में से एक होगी। चूँकि चुनाव आयुक्तों के चयन की नई प्रक्रिया ने अब प्रभावी रूप से सारी शक्तियाँ सत्ताधारी दल और प्रधान मंत्री को दे दी हैं, तो 23 वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी नए चुनाव आयुक्त की नियुक्ति क्यों नहीं की गई है? मोदी सरकार को इन सवालों का जवाब देना चाहिए और उचित स्पष्टीकरण देना चाहिए।
केसी वेणुगोपाल का एक्स
कांग्रेस महासचिव संगठन के सी वेणुगोपाल ने एक्स पर लिखा दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए यह बेहद चिंताजनक है कि चुनाव आयुक्त श्री अरुण गोयल ने लोकसभा चुनाव के ठीक पहले इस्तीफा दे दिया है। ईसीआई जैसी संवैधानिक संस्था कैसे काम कर रही है और सरकार उन पर किस तरह दबाव डालती है, इसमें बिल्कुल भी पारदर्शिता नहीं है। 2019 के चुनावों के दौरान, श्री अशोक लवासा ने आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के लिए पीएम को क्लीन चिट देने के खिलाफ असहमति जताई थी। बाद में, उन्हें लगातार पूछताछ का सामना करना पड़ा। यह रवैया दर्शाता है कि शासन लोकतांत्रिक परंपराओं को नष्ट करने पर तुला हुआ है। इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए, और ईसीआई को हर समय पूरी तरह से गैर-पक्षपातपूर्ण होना चाहिए।
Prashant Dixit

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