New Pension Rule: महिला कर्मचारियों की पेंशन को लेकर हुआ यह बड़ा बदलाव

surya soni
Published on: 3 Jan 2024 4:37 PM IST
New Pension Rule: महिला कर्मचारियों की पेंशन को लेकर हुआ यह बड़ा बदलाव
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Pension Rule: पेंशन को लेकर मह‍िला कर्मचार‍ियों के ल‍िए सरकार की तरफ से पेंशन न‍ियमों में बदलाव क‍िया गया है. अब कोई सरकारी महिला कर्मचारी अपने पति की जगह अपने बच्चों का नाम भी जोड़ सकती है. सरकार का मानना है कि इस फैसले से महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में मदद मिलेगी. इससे महिलाओं की कई समस्याओं का समाधान हो सकता है.

पेंशन और पेंशनर्स वेलफेयर डिपार्टमेंट की ओर से केंद्रीय महिला कर्मचारियों के लिए पेंशन से जुड़ा बड़ा ऐलान किया है अब महिलाएं विवादित शादी या महिला द्वारा पति के खिलाफ किसी भी तरह का कानूनी केस दर्ज कराया हो, उस स्थिति महिला कर्मचारी अपनी पेंशन के नॉमिनी के रूप में बच्चों का नाम एड करा सकेंगी. सेंट्रल स‍िव‍िल सर्व‍िसेज (पेंशन) रूल्‍स, 2021 के नियम 50 के तहत सरकारी कर्मचार‍ियों या र‍िटायर्ड सरकारी कर्मचार‍ियों की मौत के बाद फैम‍िली पेंशन दी जाती है. यदि किसी मृत सरकारी कर्मचारी या पेंशनर का पति या पत्‍नी ज‍िंदा है तो फैम‍िली पेंशन पर सबसे पहला हक उसके पति या पत्‍नी का होता है

तलाक का केस

Pension Rule: सरकार के फैसले के अनुसार अगर किसी महिला सरकारी कर्मचारी की शादी से जुड़ा हुआ तलाक का केस कोर्ट में चल रहा हो. ऐसे में महिला कर्मचारी फैम‍िली पेंशन के लिए अपने पति के बजाय बंचो को नॉम‍िनेट कर सकती हैं. DoPPW की तरफ से क‍िए गए बदलाव के तहत क‍िसी महिला सरकारी कर्मचारी की फैम‍िली पेंशन को उसके पति से पहले उसके बच्चे को वितरित करने की अनुमति देता है अगर महिला ने अपनी पति पर घरेलू हिंसा या दूसरे किसी तरह के उत्पीड़न का केस भी दर्ज कराया है. ऐसी स्थिति में महिला कर्मचारी अपने पति की की जगह बच्चों को नॉमिनेट कर सकती है.

बच्चे को प्राथमिकता

Pension Rule: वहीं सरकार के ऐलान के बाद अगर किसी महिला का पति जीवित है और उनका एक ही बच्चा है तो फैमिली पेंशन के लिए उस बच्चे को भी प्राथमिकता मिलेगी. सरकार का मानना है कि इससे महिलाओं के ज्यादा आत्मनिर्भर होने और ज्यादा सपोर्ट मिलने की उम्मीद है. खास बात तो ये है कि इस फैसले से पहले महिला कर्मचारियों की ओर से मंत्रालय को पेंशन के लिए बच्चों को नॉमिनी बनाने से जुड़े कई लेटर्स और ईमेल मिल रहे थे. जिसकी वजह से सरकार और मंत्रालय को यह फैसला लेना पड़ा.
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