Beating Retreat 2025: क्यों होता है गणतंत्र दिवस के बाद बीटिंग रिट्रीट समारोह, जानें इसका इतिहास

बीटिंग रिट्रीट समारोह के टिकटों की कीमत ₹100 है और यह आमंत्रण मोबाइल ऐप और आमंत्रण वेबसाइट के माध्यम से बिक्री पर होंगे।

Preeti Mishra
Published on: 27 Jan 2025 4:53 PM IST
Beating Retreat 2025: क्यों होता है गणतंत्र दिवस के बाद बीटिंग रिट्रीट समारोह, जानें इसका इतिहास
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Beating Retreat 2025: बीटिंग रिट्रीट समारोह भारत में गणतंत्र दिवस उत्सव के अंत का प्रतीक है। यह गणतंत्र दिवस के तीन दिन बाद 29 जनवरी की शाम को विजय चौक, नई दिल्ली में आयोजित किया जाता है। इस समारोह (Beating Retreat 2025) में भारतीय सेना, नौसेना, वायु सेना, दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के बैंड द्वारा संगीतमय प्रदर्शन किया जाएगा। बीटिंग रिट्रीट समारोह (Beating Retreat 2025) की अध्यक्षता भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी। बता दें कि भारत में राष्ट्रपति ही सशस्त्र बलों का सर्वोच्च कमांडर होता हैं। भारत में बीटिंग रिट्रीट समारोह पहली बार 1950 के दशक में महारानी एलिजाबेथ और प्रिंस फिलिप की राजकीय यात्रा के दौरान आयोजित किया गया था। तब से, यह समारोह भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता और बलिदान को श्रद्धांजलि देने के लिए एक वार्षिक कार्यक्रम बन गया है।
बीटिंग रिट्रीट समारोह (Beating Retreat 2025 Date) के टिकटों की कीमत ₹100 है और यह आमंत्रण मोबाइल ऐप और आमंत्रण वेबसाइट के माध्यम से बिक्री पर होंगे। दिल्ली में काउंटरों से भी टिकट ख़रीदे जा सकते हैं। समारोह का समापन राष्ट्रीय ध्वज को उतारने और राष्ट्रपति भवन, नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक की रोशनी के साथ होता है। बीटिंग रिट्रीट समारोह लड़ाई के बाद शांति का प्रतीक है और भारत की समृद्ध सैन्य परंपराओं को दर्शाती है। यह देश की सशस्त्र सेनाओं के प्रति एकता, देशभक्ति और सम्मान का एक गंभीर लेकिन जीवंत प्रदर्शन है।

बीटिंग रिट्रीट समारोह का इतिहास

भारत में बीटिंग रिट्रीट समारोह (Beating Retreat Ceremony History) की उत्पत्ति 17वीं शताब्दी की सैन्य परंपरा से हुई है, जहां ड्रम बजाकर सैनिकों को पीछे हटने और सूर्यास्त के समय अपने शिविरों में लौटने का संकेत दिया जाता था। 1950 के दशक में भारत में शुरू किए गए इस समारोह को गणतंत्र दिवस समारोह की समाप्ति को चिह्नित करने के लिए अनुकूलित किया गया था। पहली औपचारिक बीटिंग रिट्रीट 1955 में भारतीय सेना के मेजर रॉबर्ट्स के मार्गदर्शन में विजय चौक, नई दिल्ली में आयोजित की गई थी। यह परंपरा दिन भर की लड़ाइयों के अंत और शांति का प्रतीक है। समय के साथ, यह एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम के रूप में विकसित हुआ है, जो संगीत और तमाशा के माध्यम से भारत के सैन्य बैंड, अनुशासन और एकता का प्रदर्शन करता है।

क्या होता है बीटिंग रिट्रीट समारोह में?

हर साल 29 जनवरी को विजय चौक पर होने वाला समारोह, गणतंत्र दिवस समारोह (Republic Day 2025) के समापन (Beating Retreat Ceremony 2025) का प्रतीक है। समारोह की मुख्य अतिथि भारत की राष्ट्रपति होंगी। समारोह में सबसे पहले 'राष्ट्रपति के अंगरक्षकों' की सुरक्षा में घुड़सवार सेना इकाई में आते हैं। इसके बड़ा जब राष्ट्रपति आएंगी तो पीबीजी कमांडर यूनिट को राष्ट्रीय सलामी देने के लिए कहता है। इसके बाद सामूहिक बैंड द्वारा भारतीय राष्ट्रगान, जन गण मन बजाया जाता है और साथ ही राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है।
समारोह के दौरान विभिन्न सेना रेजिमेंटों के सैन्य बैंड, पाइप और ड्रम बैंड, बिगुलर और ट्रम्पेटर्स प्रदर्शन करते हैं। इसके अलावा, नौसेना और वायु सेना के प्रत्येक बैंड भी मौजूद रहते हैं। सेना के मिलिट्री बैंड द्वारा बजाई जाने वाली अधिकांश धुनें भारतीय धुनों पर आधारित होती हैं। जब रंगों और मानकों की परेड की जाती है तो 'बीटिंग द रिट्रीट' राष्ट्रीय गौरव की एक घटना के रूप में उभरती है। इस समारोह (Beating Retreat Ceremony Starting Date) की शुरुआत 1950 के दशक की शुरुआत में हुई जब भारतीय सेना के मेजर रॉबर्ट्स ने सामूहिक बैंड द्वारा प्रदर्शन के अनूठे समारोह को स्वदेशी रूप से विकसित किया। 'बीटिंग रिट्रीट' सदियों पुरानी सैन्य परंपरा का प्रतीक है, जब सैनिक लड़ना बंद कर देते थे, अपने हथियार बंद कर देते थे और युद्ध के मैदान से हट जाते थे और रिट्रीट की ध्वनि के साथ सूर्यास्त के समय शिविरों में लौट आते थे। यह समारोह बीते समय के प्रति चाहत पैदा करता है। यह भी पढ़ें: Republic Day Mehndi Designs: गणतंत्र दिवस पर अपने हाथों को सजाएं मेहंदी से, देखें पांच खूबसूरत डिज़ाइन
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Senior Sub Editor (Feature)

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