Bangalore RCB Stampede: परेड के लिए क्या तैयाऱी थी, कौन है आयोजक? भगदड़ पर कर्नाटक HC की फटकार
Bangalore RCB Stampede: बीते 3 जून 2025 को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने अपनी पहली IPL ट्रॉफी जीतकर इतिहास रचा। लेकिन इस जीत का जश्न 5 जून को चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर आयोजित विजय परेड के दौरान एक भयावह त्रासदी में बदल गया। भारी भीड़ के कारण मची भगदड़ में 11 लोगों की मौत (5 महिलाएँ और 6 पुरुष) हो गई और 56 लोग घायल हुए। इस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया और भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, और आयोजन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े किए।
हाई कोर्ट की सुनवाई और सवाल
इस त्रासदी को लेकर कर्नाटक हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव ने राज्य सरकार से कई तीखे सवाल पूछे और घटना पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने अगली सुनवाई 10 जून 2025 के लिए निर्धारित की है. कोर्ट ने आज सरकार से पूछा कि सुरक्षा के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP): क्या ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई SOP थी? वहीं कोर्ट ने कहा कि क्या मेडिकल स्टाफ, एंबुलेंस, और तत्काल अस्पताल सुविधाएँ उपलब्ध थीं? क्या भगदड़ से निपटने की कोई योजना थी? इसके अलावा इतने बड़े आयोजन के लिए पहले से क्या इंतजाम किए गए थे? वहीं कोर्ट ने कार्यक्रम का आयोजन किसने किया और जिम्मेदारी किसकी थी ये भी पूछा है? इसके साथ ही कोर्ट ने पूछा है कि स्टेडियम में कितने गेट हैं और कितने खुले थे?राज्य सरकार का जवाब
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता (एजी) शशिकरण शेट्टी ने कोर्ट में जवाब दिया. उन्होंने कहा कि बेंगलुरु पुलिस ने सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए थे। 1,643 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी, पानी के टैंकर और अन्य व्यवस्थाएँ भी मौजूद थीं। वहीं सुबह 4 बजे से ही बेंगलुरु और अन्य राज्यों से लोग जुटने लगे थे। सुबह 3 बजे तक चिन्नास्वामी स्टेडियम के आसपास भारी भीड़ इकट्ठा हो गई थी। अनुमानित 2.5 लाख लोग इस आयोजन में शामिल हुए, जो सरकार की अपेक्षा से कहीं अधिक था। सरकार ने बताया कि आयोजन की जिम्मेदारी RCB और कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (KSCA) की थी। वहीं एजी ने दावा किया कि स्टेडियम के 21 गेटों में से सभी खुले थे, लेकिन वकील जीआर मोहन ने दावा किया कि केवल 3 गेट ही खुले थे. इसके साथ ही सरकार ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं, और जल्द ही पूरी सच्चाई सामने आएगी।सरकार पर सख्त हुआ कोर्ट
वहीं हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इस त्रासदी पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या भगदड़ को रोकने के लिए कोई ठोस गाइडलाइंस का पालन किया गया था। मामले की अगली सुनवाई 10 जून 2025 को होगी। इस बीच, बेंगलुरु के जिला प्रशासन भी घटना की जांच कर रहा है। Next Story


