Annapurna Jayanti 2025: 4 या 5 दिसंबर, कब है अन्नपूर्णा जयंती? जानें सही तिथि और महत्व

अन्नपूर्णा जयन्ती का व्रत एवं पूजन करने से जीवन में दरिद्रता का नाश होता है तथा सभी प्रकार के अभाव समाप्त होते हैं।

Preeti Mishra
Published on: 29 Nov 2025 1:16 PM IST
Annapurna Jayanti 2025: 4 या 5 दिसंबर, कब है अन्नपूर्णा जयंती? जानें सही तिथि और महत्व
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Annapurna Jayanti 2025: अन्नपूर्णा जयन्ती हिन्दु धर्म का एक पावन पर्व है जो माता अन्नपूर्णा के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। अन्नपूर्णा देवी को अन्न, समृद्धि एवं जीवन निर्वाह की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। अन्नपूर्णा देवी (Annapurna Jayanti 2025) का मुख्य मन्दिर वाराणसी में स्थित है जहाँ भगवान शिव की अर्धाङ्गिनी तथा अन्नदान की अधिष्ठात्री के रूप में उनकी पूजा-अर्चना की जाती है।

कब है अन्नपूर्णा जयंती 2025?

द्रिक पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा तिथि को अन्नपूर्णा जयन्ती मनायी जाती है। मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत दिसम्बर 04, को सुबह 08:37 बजे होगी और इसका समापन दिसम्बर 05 को भोर में 04:43 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार, अन्नपूर्णा जयन्ती बृहस्पतिवार, दिसम्बर 4 को मनाई जाएगी।

Annapurna Jayanti 2025: 4 या 5 दिसंबर, कब है अन्नपूर्णा जयंती? जानें सही तिथि और महत्व

अन्नपूर्णा जयंती का महत्व

अन्नपूर्णा जयन्ती का व्रत एवं पूजन करने से जीवन में दरिद्रता का नाश होता है तथा सभी प्रकार के अभाव समाप्त होते हैं। घर में धन-धान्य की वृद्धि होती रहती है तथा अन्न का कभी अभाव नहीं होता। इस दिन माता अन्नपूर्णा का नाम-स्मरण एवं उनकी आराधना करने से भक्त को मोक्ष की प्राप्ति तक सम्भव होती है। अन्नपूर्णा देवी का स्वरूप शास्त्रों में अत्यन्त मनोहर वर्णित किया गया है। वे एक हाथ में स्वर्ण पात्र एवं दूसरे हाथ में अन्नदान करने का करुणामय भाव लिये हुये हैं। उनके चरणों में स्वयं महादेव भिक्षापात्र लिये खड़े हैं। यह चित्रण अन्न की महत्ता और स्त्री-शक्ति के आदर्श रूप का बोध कराता है।

अन्नपूर्णा देवी की कथा

अन्नपूर्णा देवी का वर्णन स्कन्दपुराण, शिवपुराण तथा अन्य आगम ग्रन्थों में है। कथा के अनुसार एक बार भगवान शिव ने कहा कि इस संसार में सब मिथ्या है तथा अन्न भी माया है। उनकी यह बात सुनकर माता पार्वती ने समस्त अन्न का लोप कर दिया। परिणामस्वरूप पृथ्वी पर भयङ्कर अकाल पड़ गया, जीव-जन्तु एवं मानव सभी अन्न के अभाव से कष्ट पाने लगे। तब शिवजी को अपनी भूल का बोध हुआ तथा उन्होंने माता पार्वती से क्षमा-याचना की। उसी समय पार्वती अन्नपूर्णा देवी के रूप में प्रकट हुयीं एवं वाराणसी में उन्होंने काशीवासियों को अन्न प्रदान किया। तभी से माता अन्नपूर्णा की पूजा का महत्व स्थापित हुआ।

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क्या होता है अन्नपूर्णा जयंती के दिन?

अन्नपूर्णा जयन्ती के दिन श्रद्धालु प्रातःकाल स्नान करके अन्नपूर्णा माता का पूजन करते हैं। पूजा में अन्न, फल, पुष्प, दीप, धूप, नैवेद्य एवं जल का अर्पण किया जाता है। इस दिन विशेषतः अन्नदान का महत्व है। लोग अनाज, भोजन एवं वस्त्र दान करके पुण्य अर्जित करते हैं। मान्यताओं के अनुसार इस दिन किया गया अन्नदान अक्षय फल प्रदान करने वाला होता है।

वाराणसी में अन्नपूर्णा जयन्ती पर होता है विशेष उत्सव

वाराणसी में अन्नपूर्णा जयन्ती का विशेष उत्सव होता है। काशी स्थित अन्नपूर्णा मन्दिर में भव्य दर्शन एवं आरती होती है तथा विशाल अन्नक्षेत्र में हजारों भक्तों को भोजन कराया जाता है। यहाँ यह परम्परा है कि इस दिन शिवजी भी अन्नपूर्णा माता से भिक्षा ग्रहण करते हैं। इस उत्सव का मुख्य भाव यही है कि भगवान शिव स्वयं भी मानते हैं कि संसार में अन्न का महत्व सर्वोपरि है। यह भी पढ़ें: दिसंबर में इस दिन से शुरू हो जायेगा खरमास, थम जाएंगे सभी शुभ कार्य
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Senior Sub Editor (Feature)

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