Sakat Chauth 2026: सकट चौथ 2026 सबसे महत्वपूर्ण हिंदू व्रतों में से एक है, जिसे मुख्य रूप से माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए रखती हैं। माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाने वाला यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित है, जो बाधाओं को दूर करने वाले और भक्तों के रक्षक हैं। इसे तिलकुट चौथ (Sakat Chauth 2026) के नाम से भी जाना जाता है, इस दिन का गहरा धार्मिक और भावनात्मक महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सकट चौथ (Sakat Chauth 2026) की पूजा व्रत कथा पढ़े बिना अधूरी मानी जाती है। माना जाता है कि भक्ति के साथ कथा सुनने या पढ़ने से भगवान गणेश का पूरा आशीर्वाद मिलता है और व्रत सफल होता है।
सकट चौथ कथा इतनी ज़रूरी क्यों है?
हिंदू धर्मग्रंथों और परंपराओं में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि कोई भी व्रत तभी पूरा होता है जब उसकी कथा सुनी या सुनाई जाए। सकट चौथ की कथा बताती है:
- भगवान गणेश की महिमा - विश्वास और भक्ति की शक्ति ऐसा माना जाता है कि जो माताएं कथा सुने बिना व्रत रखती हैं, उन्हें पूरा आध्यात्मिक लाभ नहीं मिलता। यह कहानी भक्ति को मज़बूत करती है और भक्तों को सच्ची पूजा के नतीजों की याद दिलाती है।
सकट चौथ व्रत कथा
लोकप्रिय मान्यता के अनुसार, एक बार एक गरीब महिला थी जो मुश्किलों के बावजूद बहुत श्रद्धा से सकट चौथ का व्रत करती थी। उसकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर भगवान गणेश प्रकट हुए और उसके बच्चे को लंबी उम्र और सुरक्षा का आशीर्वाद दिया। दूसरी ओर, एक अमीर महिला जिसने बिना श्रद्धा के व्रत किया और कथा नहीं सुनी, उसे वैसा आशीर्वाद नहीं मिला। यह कहानी सिखाती है कि भगवान की कृपा पाने के लिए श्रद्धा, धैर्य और कथा सहित सभी रीति-रिवाजों का पालन करना ज़रूरी है।
सकट चौथ 2026 संपूर्ण पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। अपने बच्चे की भलाई और लंबी उम्र के लिए व्रत रखने का संकल्प लें। - घर और पूजा की जगह को साफ करें। एक लकड़ी की चौकी रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएँ। भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। - रोली, चावल (अक्षत), फूल, दूर्वा घास और चंदन चढ़ाएँ। दीया और अगरबत्ती जलाएँ। - तिल और गुड़ की मिठाइयाँ, तिलकुट लड्डू, मोदक, फल और मिठाइयाँ तैयार करें। इस दिन तिल के बीजों का विशेष महत्व होता है। - शांति से बैठें और पूरी श्रद्धा के साथ व्रत कथा सुनें या पढ़ें। यह पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। - "ॐ गण गणपतये नमः" मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। इससे भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और बाधाएँ दूर होती हैं।
सकट चौथ पर व्रत के नियम
ज़्यादातर महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। कुछ महिलाएं स्वास्थ्य और पारिवारिक परंपरा के अनुसार फल खाकर व्रत रखती हैं। व्रत चंद्रमा दिखने के बाद ही तोड़ा जाता है। शाम को, जब चंद्रमा निकलता है तब पानी, दूध, चावल और फूलों से चंद्रमा को अर्घ्य दें। बच्चों की खुशी और सुरक्षा के लिए प्रार्थना करें। चंद्रमा की पूजा के बाद ही व्रत तोड़ा जाता है। इस अनुष्ठान का बहुत महत्व है और यह व्रत को पूरा करता है। पूजा के बाद, ज़रूरतमंदों को तिल, गुड़, कपड़े, खाना या पैसे दान करना बहुत शुभ माना जाता है। दान करने से व्रत का आध्यात्मिक पुण्य बढ़ता है।
धार्मिक मान्यता और महत्व
ऐसा माना जाता है कि सही पूजा विधि और कथा के साथ सकट चौथ 2026 का व्रत रखने से: - बच्चों को बीमारी और दुर्भाग्य से बचाता है। - पारिवारिक जीवन से बाधाएं दूर होती हैं। - शांति, समृद्धि और खुशहाली आती है। - भगवान गणेश का विशेष आशीर्वाद मिलता है।
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