Sakat Chauth 2026 Date: नए साल में कब मनाया जाएगा सकट चौथ, जानिए तिथि और शुभ मुहूर्त

सकट चौथ को तिलकुट चौथ के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत में तिल, गुड़, दूर्वा घास और मोदक से भगवान गणेश की पूजा की जाती है।

Update: 2025-12-22 07:55 GMT
Sakat Chauth 2026 Date: सकट चौथ एक महत्वपूर्ण हिंदू व्रत है जिसे मुख्य रूप से माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए रखती हैं। यह माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (Sakat Chauth 2026 Date) को मनाया जाता है और यह बाधाओं को दूर करने वाले भगवान गणेश को समर्पित है। सकट चौथ को तिलकुट चौथ के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत में तिल, गुड़, दूर्वा घास और मोदक से भगवान गणेश की पूजा की जाती है। माताएं सख्त व्रत रखती हैं, व्रत कथा सुनती हैं और चंद्रमा दिखने के बाद व्रत तोड़ती हैं। ऐसा माना जाता है कि भक्ति भाव से सकट चौथ (Sakat Chauth 2026 Date) का व्रत करने से कठिनाइयां दूर होती हैं और परिवार में शांति, समृद्धि और दैवीय आशीर्वाद आता है।

कब है अगले वर्ष सकट चौथ?

सकट चौथ माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। जनवरी 2026 में माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 6 जनवरी को सुबह 08:01 बजे से आरंभ होगी और इस तिथि का समापन 7 जनवरी को सुबह 06:52 बजे पर होगा। सकट चौथ का व्रत चंद्र पूजन के आधार पर तय होता है तो इस तरह 2026 में सकट चौथ 6 जनवरी को मनाई जाएगी।

सकट चौथ पूजा मुहूर्त

सकट चौथ में चाँद की पूजा होती है। इस दिन पूजा का सबसे शुभ समय शाम 7:21 बजे से रात 9:03 बजे तक माना गया है। सकट चौथ के दिन चंद्रोदय का समय रात 8:54 बजे के आसपास होगा। इस व्रत का पारण चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने के बाद ही किया जाता है।

सकट चौथ पूजा विधि

सकट चौथ का व्रत मुख्य रूप से संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए माताएं रखती हैं। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है। पूजा विधि इस प्रकार है: - सकट चौथ के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। - स्वच्छ वस्त्र पहनकर हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर संतान की रक्षा व कल्याण के लिए व्रत का संकल्प लें। - घर के मंदिर या साफ स्थान पर चौकी रखें। उस पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। - गणेश जी को रोली, चंदन, दूर्वा घास, फूल, अक्षत अर्पित करें। - भोग में तिल, तिलकुट, मोदक और फल चढ़ाएं। - सकट चौथ की कथा ध्यानपूर्वक सुनें या पढ़ें। कथा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है।
- “ॐ गण गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। - परंपरा अनुसार अधिकतर माताएं निर्जला व्रत रखती हैं, हालांकि कुछ स्थानों पर फलाहार भी किया जाता है। - शाम को चंद्रमा निकलने पर जल, दूध और अक्षत से चंद्र देव को अर्घ्य दें। इसके बाद ही व्रत खोलें। - तिल, गुड़, वस्त्र या भोजन का दान करना शुभ माना जाता है। - इस विधि से सकट चौथ की पूजा करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और बच्चों को रोग, संकट और अकाल मृत्यु से रक्षा मिलती है। यह भी पढ़ें: Festivals Calendar 2026: अगले वर्ष कब है होली, दिवाली, रक्षा बंधन; देखें त्योहारों की पूरी लिस्ट
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