30 या 31 दिसंबर, कब है पौष पुत्रदा एकादशी? जानिए सही तिथि

पौष पुत्रदा एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि यह न केवल आध्यात्मिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त करती है, बल्कि पारिवारिक जीवन में सुख और शांति का आशीर्वाद भी देती है।

Update: 2025-12-29 09:47 GMT
Paush Putrada Ekadashi 2025: हिंदू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व है। हर एकादशी किसी न किसी रूप में भक्ति, दान और तपस्या का संदेश देती है। ऐसी ही एक एकादशी है पौष पुत्रदा एकादशी, जो पौष महीने के शुक्ल पक्ष में आती है। यह एकादशी (Paush Putrada Ekadashi 2025) संतान प्राप्ति और बच्चों की भलाई के लिए बहुत शुभ मानी जाती है। पौष पुत्रदा एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि यह न केवल आध्यात्मिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त करती है, बल्कि पारिवारिक जीवन में सुख और शांति का आशीर्वाद भी देती है।

पौष पुत्रदा एकादशी 2025 कब है?

कई लोगों को साल की आखिरी एकादशी तिथि को लेकर भ्रम है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, पौष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी 30 दिसंबर 2025 को सुबह 7:50 बजे शुरू होगी। यह अगले दिन, 31 दिसंबर 2025 को सुबह 5:00 बजे समाप्त होगी। हिंदू धर्म में शुभ कार्य सूर्योदय के बाद किए जाते हैं; इसलिए, उदयातिथि के अनुसार, पौष पुत्रदा एकादशी 30 दिसंबर को मनाई जाएगी। गृहस्थ इसी दिन एकादशी का व्रत रखेंगे। जबकि वैषणव जन पौष पुत्रदा एकादशी इसके अगले दिन 31 दिसंबर को मनाएंगे।
इस वर्ष पुत्रदा एकादशी पर कई योग बन रहे हैं। एकादशी पर सिद्ध, शुभ, रवि योग और भद्रावास योग बन रहे हैं। इन योग में भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ फलदायी रहेगा।

कब है पारण का समय?

पौष पुत्रदा एकादशी मंगलवार, दिसम्बर 30, 2025 को मनाई जाएगी। गृहस्थ लोग इस दिन व्रत रखेंगे। जो लोग इस दिन व्रत रखेंगे उनके लिए 31 दिसम्बर को पारण (व्रत तोड़ने का) समय - दोपहर 01:12 बजे से 03:18 बजे तक रहेगा। पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय सुबह 10:12 बजे होगा। वहीं 31 दिसंबर को व्रत रखने वाले पारण 1 जनवरी 2026 को सुबह 07:13 मिनट से 09:19 मिनट तक कर सकते हैं।

पौष पुत्रदा एकादशी का महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपत्तियों के लिए पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत बहुत फलदायी माना जाता है। इसका उल्लेख विष्णु पुराण और पद्म पुराण में मिलता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने, व्रत रखने और दान करने से संतान सुख मिलता है, और अगर पहले से बच्चे हैं, तो उनके अच्छे स्वास्थ्य और समृद्ध जीवन की प्राप्ति होती है।
इस व्रत को करने वाले व्यक्ति को अपने मन, वाणी और कर्मों को शुद्ध रखना चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और प्रार्थना करने से सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं। यह भी पढ़ें: पौष पूर्णिमा स्नान के साथ शुरू होगा माघ मेला 2026, जानें तिथि और महत्व
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