मशहूर फिल्म निर्देशक श्याम बेनेगल का 90 साल की उम्र में निधन, क्रोनिक किडनी संबंधित बीमारी से थे परेशान

प्रसिद्ध फिल्म निर्माता श्याम बेनेगल लंबे समय से क्रोनिक किडनी संबंधित बीमारी से पीड़ित थे। उन्होंने सोमवार को मुंबई के वोकहार्ट अस्पताल में शाम करीब 6:30 बजे अंतिम सांसे ली।

Update: 2024-12-23 15:56 GMT
प्रसिद्ध फिल्म निर्माता श्याम बेनेगल (shyam benegal passes away) का सोमवार को 90 साल की उम्र में निधन हो गया। बेनेगल ने सोमवार को मुंबई के वोकहार्ट अस्पताल में शाम 6:30 बजे के करीब अंतिम सांसे ली। वे लंबे समय से क्रोनिक किडनी संबंधित बीमारी से पीड़ित थे। उनके निधन की पुष्टि उनकी बेटी पिया बेनेगल ने मीडिया से की।

14 दिसंबर को मनाया था जन्मदिन

जानकारी के मुताबिक, श्याम बेनेगल (shyam benegal) ने 14 दिसंबर को अपने दोस्तों और परिवार के साथ अपना जन्मदिन मनाया। इस दौरान अभिनेता कुलभूषण खरबंदा, नसीरुद्दीन शाह, दिव्या दत्ता, शबाना आज़मी, रजित कपूर, अतुल तिवारी, फिल्म निर्माता-अभिनेता और शशि कपूर के बेटे कुनाल कपूर समेत कई अन्य हस्तियां शामिल हुईं।

पद्म श्री और पद्म भूषण से सम्मानित

भारतीय सिनेमा में शानदार काम के लिए बेनेगल को भारत सरकार द्वारा 1976 में पद्म श्री और 1991 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। उनकी सफल फिल्मों में मंथन, जुबैदा और सरदारी बेगम शामिल हैं।

हैदराबाद में हुआ था जन्म

श्याम बेनेगल (shyam benegal dies) जन्म 14 दिसंबर 1934 को हैदराबाद के कोंकणी भाषी चित्रापुर सारस्वत ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता श्रीधर बी. बेनेगल मूल रूप से कर्नाटक से थे। वह एक फोटोग्राफर थे। श्याम को अपने पिता से ही फिल्म निर्माण में रुचि लेने की प्रेरणा मिली थी।

महज 12 साल की उम्र में बनाई थी पहली फिल्म

बेनेगल ने महज 12 साल की उम्र में अपने पिता द्वारा गिफ्ट में दिए गए कैमरे से अपनी पहली फिल्म बनाई थी। उन्होंने हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री प्राप्त की। यहां उन्होंने हैदराबाद फिल्म सोसाइटी की स्थापना की। यह उनकी सिनेमा के क्षेत्र में शानदार काम की शुरुआत थी।

इन फिल्मों के लिए हमेशा किया जाएगा याद

श्याम बेनेगल (shyam benegal news) अपनी फिल्मों अंकुर, मंडी, मंथन, नेताजी सुभाष चंद्र बोस: द फॉरगॉटन हीरो, जुबैदा और वेल डन अब्बा जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है। बता दें कि इनमें से अधिकांश फिल्में 70 के दशक के मध्य या 80 के दशक में रिलीज हुई थीं और भारतीय पैरेलल सिनेमा का हिस्सा मानी जाती थीं।
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