Surya Grahan 2026: महाशिवरात्रि के बाद लगेगा सूर्य ग्रहण, जानें तिथि और इसका प्रभाव

भारत में श्रद्धालुओं और उत्साही लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सूर्य ग्रहण यहां दिखाई देगा और क्या सूतक काल जैसे धार्मिक नियम लागू होंगे?

Update: 2026-02-10 18:16 GMT

Surya Grahan 2026: महाशिवरात्रि के बाद अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण लगेगा। यह ग्रहण फाल्गुन मास की अमावस्या तिथि को लगेगा। 2026 का पहला सूर्य ग्रहण फरवरी महीने में होगा। भारत में श्रद्धालुओं और उत्साही लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सूर्य ग्रहण यहां दिखाई देगा और क्या सूतक काल जैसे धार्मिक नियम लागू होंगे?

सूर्य ग्रहण 2026: तिथि और ज्योतिषीय महत्व

इस वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण मंगलवार, 17 फरवरी, 2026 को होगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह घटना फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि के साथ मेल खाती है।

ज्योतिषीय दृष्टि से, यह ग्रहण कुंभ राशि में और धनिष्ठा नक्षत्र के अंतर्गत होगा। ग्रहों की ये स्थिति वैदिक ज्योतिष का पालन करने वालों के लिए इस घटना को महत्वपूर्ण बनाती है, भले ही ग्रहण उनके क्षेत्र में दिखाई न दे।

सूर्य ग्रहण 2026 का समय

जो लोग इस घटना पर नज़र रख रहे हैं, उनके लिए ग्रहण कई घंटों तक चलेगा। समय इस प्रकार है:

ग्रहण प्रारंभ: दोपहर 3:26 बजे

ग्रहण समाप्त: शाम 7:57 बजे

वलयाकार सूर्य ग्रहण क्या है?

वलयाकार सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी से सबसे दूर (अपोजी) होता है। इस दूरी के कारण, चंद्रमा सूर्य से छोटा दिखाई देता है और उसे पूरी तरह से नहीं ढक पाता। इसके बजाय, यह केवल सूर्य के केंद्र को ही ढकता है, जिससे सूर्य के बाहरी किनारे दिखाई देते हैं और एक चमकदार "आग का छल्ला" या वलय बनता है। यह मनमोहक दृश्य खगोलविदों और फोटोग्राफरों के बीच बहुत लोकप्रिय है।

क्या भारत में सूर्य ग्रहण दिखाई देगा?

यह नजारा देखने में बेहद खूबसूरत होगा, लेकिन भारत में आकाश प्रेमियों के लिए एक बुरी खबर है। 17 फरवरी, 2026 को होने वाला वलयाकार सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।

चूंकि यह ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, इसलिए सूतक काल (ग्रहण से पहले और ग्रहण के दौरान माना जाने वाला अशुभ समय) के नियम लागू नहीं होंगे। मंदिर खुले रहेंगे और दैनिक धार्मिक अनुष्ठान बिना किसी प्रतिबंध के किए जा सकेंगे।

सूर्य ग्रहण को कहां देख सकते हैं?

भारत में भले ही यह ग्रहण न दिखे, लेकिन दुनिया के अन्य हिस्सों में यह दिखाई देगा। "रिंग ऑफ फायर" (सूर्य का वलय) आंशिक रूप से इन स्थानों पर दिखाई देगा:

दक्षिणी अफ्रीका

दक्षिण अमेरिका का सुदूर दक्षिणी भाग

अंटार्कटिका का अधिकांश भाग

जिम्बाब्वे, मॉरीशस, नामीबिया और तंजानिया सहित अन्य देश

भारत में जो लोग इस खगोलीय घटना को देखना चाहते हैं, उनके लिए नासा जैसी अंतरिक्ष एजेंसियों से लाइव स्ट्रीमिंग देखना सबसे अच्छा विकल्प है।

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