अडानी समूह पर एक बार फिर गहराया संकट; मूडीज ने 7 कंपनियों का आउटलुक किया नेगेटिव, फिच ने बॉन्ड्स को रखा निगरानी में

अमेरिकी जांच एजेंसियों द्वारा रिश्वत के आरोपों के बाद अडानी समूह की मुश्किलें बढ़ीं, वित्तीय संस्थाओं ने जताई चिंता

Vyom Tiwari
Published on: 27 Nov 2024 6:52 PM IST
अडानी समूह पर एक बार फिर गहराया संकट; मूडीज ने 7 कंपनियों का आउटलुक किया नेगेटिव, फिच ने बॉन्ड्स को रखा निगरानी में
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Adani समूह की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अमेरिकी जांच एजेंसियों द्वारा रिश्वत के आरोप लगाए जाने के बाद अब वैश्विक रेटिंग एजेंसियों ने भी समूह की कंपनियों पर सख्त रुख अपनाया है। मूडीज ने अडानी समूह की 7 प्रमुख कंपनियों का क्रेडिट आउटलुक घटाकर 'नकारात्मक' कर दिया है, जबकि फिच ने कुछ बॉन्ड्स को निगरानी सूची में डाल दिया है। इन कदमों से समूह की वित्तीय स्थिति और निवेशकों के भरोसे पर गहरा असर पड़ सकता है।

मूडीज ने क्यों घटाया आउटलुक?

मूडीज ने अडानी ग्रीन एनर्जी और अडानी पोर्ट्स सहित समूह की 7 कंपनियों का क्रेडिट आउटलुक 'स्थिर' से घटाकर 'नकारात्मक' कर दिया है। इन कंपनियों में अडानी ग्रीन एनर्जी और अडानी ट्रांसमिशन की दो-दो इकाइयां, अडानी इलेक्ट्रिसिटी मुंबई लिमिटेड, अडानी पोर्ट्स और अडानी इंटरनेशनल कंटेनर टर्मिनल शामिल हैं। मूडीज का कहना है कि अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय द्वारा अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के चेयरमैन गौतम अदानी और कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक अभियोग के कारण उसने यह कदम उठाया है। रेटिंग एजेंसी का मानना है कि गौतम अडानी के खिलाफ लगे आरोपों से अडानी समूह की फंडिंग तक पहुंच सीमित हो सकती है। इससे समूह के पूंजीगत व्यय में वृद्धि हो सकती है और वित्तीय लचीलापन कम हो सकता है। हालांकि, मूडीज ने अडानी ग्रीन के लिए अपनी Ba1 रेटिंग और अडानी ट्रांसमिशन, अडानी इलेक्ट्रिसिटी, अडानी पोर्ट्स और अडानी इंटरनेशनल कंटेनर टर्मिनल के लिए Baa3 रेटिंग बरकरार रखी है। एजेंसी का कहना है कि सभी सात कंपनियों पर नकारात्मक आउटलुक को देखते हुए निकट भविष्य में रेटिंग में सुधार की संभावना नहीं है। लेकिन अगर कानूनी कार्रवाई स्पष्ट रूप से बिना किसी नकारात्मक क्रेडिट प्रभाव के समाप्त होती है, तो रेटिंग आउटलुक को फिर से 'स्थिर' किया जा सकता है।

फिच ने क्यों रखा निगरानी में?

वहीं दूसरी ओर, रेटिंग एजेंसी फिच ने भी अडानी समूह की कुछ इकाइयों और बॉन्ड्स को नकारात्मक निगरानी सूची में डाल दिया है। फिच का कहना है कि अडानी समूह की कुछ इकाइयों के पास अगले 12-18 महीनों के लिए पर्याप्त नकदी उपलब्ध है। लेकिन अमेरिकी जांच एजेंसियों द्वारा लगाए गए आरोपों के कारण समूह की फंडिंग लागत बढ़ सकती है और पूंजी बाजार तक पहुंच सीमित हो सकती है। फिच ने अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन, अडानी ग्रीन एनर्जी और अडानी ट्रांसमिशन के बॉन्ड्स को निगरानी सूची में रखा है। एजेंसी का मानना है कि अगर समूह को वित्त पोषण में दिक्कतें आती हैं, तो इन कंपनियों की रेटिंग पर दबाव पड़ सकता है।

अमेरिकी जांच एजेंसियों के आरोप क्या हैं?

दरअसल, अमेरिका में अडानी (Adani) समूह के मुखिया गौतम अडानी पर भारतीय अफसरों को रिश्वत देने का आरोप लगा है। न्यूयॉर्क में अमेरिकी अभियोजकों ने भारत में बिजली आपूर्ति टेंडर हासिल करने के लिए भारत सरकार के अधिकारियों को 250 मिलियन डॉलर (करीब 2200 करोड़ रुपये) से अधिक की रिश्वत देने की योजना बनाने के लिए गौतम अडानी और सात अन्य को दोषी ठहराया है। अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने भी गौतम अडानी, उनके भतीजे और अडानी ग्रीन एनर्जी के कार्यकारी सागर अडानी और एज़्योर पावर के सिरिल सेबेस्टियन डोमिनिक कैबेन्स के खिलाफ जूरी ट्रायल और दंड की मांग करते हुए अदालत का रुख किया है। SEC का आरोप है कि गौतम अडानी और सागर अडानी व्यक्तिगत रूप से भारत सरकार के अधिकारियों को रिश्वत में करोड़ों डॉलर के बराबर भुगतान करने या वादा करने में शामिल थे। इसके अलावा अडानी ग्रीन और उसके सहयोगियों ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और अमेरिका आधारित निवेशकों वाले लोन समूहों से 2 बिलियन डॉलर से अधिक का फंडरेज किया। न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले के अमेरिकी अटॉर्नी ब्रेओन पीस ने कहा है कि अडानी समूह ने अरबों डॉलर के अनुबंध हासिल करने के लिए भारत सरकार के अधिकारियों को रिश्वत देने की एक विस्तृत योजना बनाई और गौतम अडानी, सागर अडानी और विनीत एस. जैन (अडानी ग्रीन के प्रबंध निदेशक) ने रिश्वत योजना के बारे में झूठ बोला।

Adani समूह पर क्या होगा असर?

इन आरोपों और रेटिंग एजेंसियों के कदमों से अडानी समूह पर कई तरह से असर पड़ सकता है: - फंडिंग लागत बढ़ सकती है: रेटिंग में गिरावट और नकारात्मक आउटलुक से समूह को कर्ज लेने के लिए ज्यादा ब्याज देना पड़ सकता है। इससे परियोजनाओं की लागत बढ़ सकती है। - निवेशकों का भरोसा कम हो सकता है: अमेरिकी जांच एजेंसियों के आरोपों से निवेशकों का भरोसा कम हो सकता है। इससे शेयर बाजार में समूह की कंपनियों के शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है। - नए प्रोजेक्ट्स में दिक्कत: फंडिंग में दिक्कत आने से समूह को नए प्रोजेक्ट्स शुरू करने या मौजूदा प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में परेशानी हो सकती है। - अंतरराष्ट्रीय बाजार में छवि खराब: रिश्वत के आरोपों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में समूह की छवि को नुकसान पहुंच सकता है। इससे विदेशी निवेश आकर्षित करने में दिक्कत हो सकती है। हालांकि, अडानी समूह ने इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि उसके पास पर्याप्त आंतरिक नकदी है। समूह का दावा है कि वह बाहरी ऋण के बिना अपने विकास और ऋण चुकौती योजनाओं को पूरा कर सकता है। अगले 10 वर्षों में 8 लाख करोड़ रुपये निवेश की योजना है। समूह के पास 55,024 करोड़ रुपये का नकदी भंडार है, जो अगले 28 महीनों तक सभी दीर्घकालिक लोन जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। सितंबर 2024 तक नकदी भंडार 53,024 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो कुल सकल लोन बकाया का लगभग 21% है।
Vyom Tiwari

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