Gallbladder Stones: रोज़मर्रा की 5 आदतें जो बढाती हैं गॉल ब्लैडर की पथरी का ख़तरा

वर्तमान में राष्ट्रीय वयस्क आबादी का लगभग 10-20 प्रतिशत पित्ताशय की पथरी से ग्रस्त है। इसलिए, पित्ताशय की पथरी और इसके जोखिम को बढ़ाने वाली रोज़मर्रा की आदतों के बारे में जानना ज़रूरी है।

Preeti Mishra
Published on: 24 Sept 2025 8:49 PM IST
Gallbladder Stones: रोज़मर्रा की 5 आदतें जो बढाती हैं गॉल ब्लैडर की पथरी का ख़तरा
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Gallbladder Stones: आपके पित्ताशय में पाए जाने वाले पित्त के कठोर जमाव को पित्ताशय की पथरी या गॉल ब्लैडर स्टोन कहा जाता है। इसे कोलेलिथियसिस भी कहा जाता है। ये काफी आम हैं, खासकर महिलाओं में। क्लिनिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेपेटोलॉजी के अनुसार, महिलाओं की तुलना में पुरुषों में पित्ताशय की पथरी का प्रचलन अधिक है (7.6 बनाम 5.4 प्रतिशत)। वहीं विश्व स्तर पर, 6 प्रतिशत आबादी पित्ताशय की पथरी (Gallbladder Stones) से ग्रस्त है। वर्तमान में राष्ट्रीय वयस्क आबादी का लगभग 10-20 प्रतिशत पित्ताशय की पथरी से ग्रस्त है। इसलिए, पित्ताशय की पथरी और इसके जोखिम को बढ़ाने वाली रोज़मर्रा की आदतों के बारे में जानना ज़रूरी है। विशेषज्ञ ऐसी पांच आदतों के बारे में बताते हैं जो आपको पित्ताशय की पथरी ( (Gallbladder Stones) होने का ख़तरा बढ़ा सकती हैं। आइए डालते हैं एक नजर।

Gallbladder Stones: रोज़मर्रा की 5 आदतें जो बढाती हैं गॉल ब्लैडर की पथरी का ख़तरा

फैट और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट से भरपूर और फाइबर में कम डाइट लेना

आपके पित्ताशय का मुख्य कार्य पित्त को संग्रहित और मुक्त करना है, जो आपके शरीर को फैट को पचाने में मदद करता है। जब आपके आहार में लगातार अस्वास्थ्यकर फैट और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट (सफेद ब्रेड, पेस्ट्री और मीठे स्नैक्स) की मात्रा अधिक होती है, तो यह आपके पित्त के संतुलन को बिगाड़ सकता है। कम फाइबर डाइट भी स्टोन के जोखिम को बढ़ा सकता है। फाइबर पाचन और पित्त प्रवाह में मदद करता है।

ज्यादा शराब पीना

अत्यधिक शराब पीने से आपको खराब कैलोरी मिलती है और लीवर में फैट जमा हो जाती है, साथ ही पैंक्रियास में कैल्सीफिकेशन भी होता है। शराब डिस्लिपिडेमिया और पेट में सूजन भी पैदा करती है। ये सभी कारक मिलकर एक संवेदनशील व्यक्ति में पित्त पथरी का निर्माण करते हैं।

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तेज़ी से वज़न कम होना

हालांकि मोटापा पित्ताशय की पथरी का एक ज्ञात जोखिम कारक है, बहुत तेज़ी से वज़न कम करने से भी पथरी बन सकती है। जब आप कम समय में बहुत ज़्यादा वज़न कम करते हैं, तो आपका लिवर पित्त में अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल स्रावित करता है। इससे पित्ताशय की इसे संसाधित करने की क्षमता कम हो सकती है, जिससे पथरी बन सकती है। धीरे-धीरे और स्वस्थ गति से (लगभग 1-2 पाउंड प्रति सप्ताह) वज़न कम करने की सलाह दी जाती है।

गतिहीन जीवनशैली

शारीरिक गतिविधि की कमी भी पित्ताशय की पथरी के बढ़ते जोखिम से जुड़ी है। निष्क्रियता मोटापे को बढ़ावा दे सकती है, जो एक प्रमुख जोखिम कारक है। यह आपके मेटाबॉलिज़्म और गॉल ब्लैडर में पित्त के प्रवाह को भी धीमा कर देता है। नियमित व्यायाम स्वस्थ वजन बनाए रखने और समग्र पाचन स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद करता है।

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बिना देखरेख वाली दवाइयाँ लेना

कुछ दवाइयाँ पित्ताशय की पथरी के जोखिम को बढ़ाने के लिए जानी जाती हैं। खास कर कुछ नई वज़न घटाने की दवाइयाँ इस जोखिम को बढ़ाने के लिए जानी जाती हैं। हार्वर्ड हेल्थ के अनुसार, ओज़ेम्पिक एक सेमाग्लूटाइड है, और मौंजारो एक टिर्जेपेटाइड दवा है। एस्ट्रोजन रिप्लेसमेंट थेरेपी, एस्ट्रोजन ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव और टोटल पैरेंट्रल न्यूट्रिशन भी पित्ताशय की पथरी के कारणों में महत्वपूर्ण कारक हैं।

कैसे रोकें गॉल ब्लैडर की पथरी को होने से?

पित्ताशय की पथरी को अक्सर स्वस्थ जीवनशैली और आहार विकल्पों के माध्यम से रोका जा सकता है। फाइबर, साबुत अनाज, ताज़े फल और सब्ज़ियों से भरपूर संतुलित आहार लेने से जोखिम कम करने में मदद मिलती है। फैट युक्त, तले हुए और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के अत्यधिक सेवन से बचें, क्योंकि ये पित्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाते हैं, जो पथरी बनने का एक प्रमुख कारण है। खूब पानी पीने से पाचन में सहायता मिलती है और पित्त को अत्यधिक गाढ़ा होने से रोकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ वजन बनाए रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि मोटापा एक प्रमुख जोखिम कारक है। समय पर भोजन करना और लंबे समय तक उपवास न करना भी पित्ताशय के स्वास्थ्य के लिए अच्छा है। यह भी पढ़ें: Blood Pressure Control Tips: दिन में चलें बस इतने स्टेप, आपका बीपी रहेगा कंट्रोल में
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Senior Sub Editor (Feature)

Preeti Mishra is a seasoned journalist with over 12 years of rich experience in the media industry. Over the course of her career, she has worked with reputed media organizations such as DD News, Hindustan, Final Report, and Newstrack, building a strong foundation in credible and impactful journalism. She has extensively covered diverse beats including Religion, Health, Lifestyle, and Tourism, and is known for presenting complex topics in a clear, engaging, and reader-friendly manner. Her writing reflects a fine balance of authenticity, research, and public interest, making her stories both informative and relatable. Currently, She is associated with Hind First, where she is responsible for leading and curating content for the Religion, Health, Lifestyle, and Tourism sections. With her deep subject knowledge and editorial insight, she continues to deliver high-quality, meaningful content that resonates strongly with a wide audience.

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