• ftr-facebook
  • ftr-instagram
  • ftr-instagram
search-icon-img

Paush Purnima 2026: आज है साल की पहली पूर्णिमा, इस विधि से करें पूजा

पौष पूर्णिमा के दिन शाकम्भरी जयन्ती भी मनायी जाती है। इस्कॉन के अनुयायियों तथा वैष्णव सम्प्रदाय द्वारा इस दिन पुष्याभिषेक यात्रा आरम्भ की जाती है।
featured-img

Paush Purnima 2026: आज वर्ष 2026 की पहली पूर्णिमा है। आज पौष महीने का आखिरी दिन है इसलिए इसे पौष पूर्णिमा कहा जाता है। सनातन धर्म में पूर्णिमा (Paush Purnima 2026) तिथि का बहुत ज्यादा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। पौष पूर्णिमा, माघ माह में एक माह तक की जाने वाली तपस्या के आरम्भ का प्रतीक है। उत्तर भारत में प्रचलित चन्द्र कैलेण्डर के अनुसार पौष पूर्णिमा के अगले दिवस से माघ माह प्रारम्भ होता है।

पौष पूर्णिमा तिथि

पूर्णिमा के दिन चन्द्रोदय - 05:18 पी एम
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - जनवरी 02, 2026 को 06:53 पी एम बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त - जनवरी 03, 2026 को 03:32 पी एम बजे

Paush Purnima 2026: आज है साल की पहली पूर्णिमा, इस विधि से करें पूजा

पौष पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है शाकम्भरी जयन्ती

द्रिक पंचांग के अनुसार, पौष पूर्णिमा के अवसर पर वाराणसी स्थित दशाश्वमेध घाट तथा प्रयाग स्थित त्रिवेणी संगम में पवित्र डुबकी लगाना अत्यधिक शुभ एवं महत्वपूर्ण माना जाता है। माना जाता है कि, पौष पूर्णिमा के दिन पवित्र डुबकी लगाने से मनुष्य को जीवन-मरण के अनवरत चक्र से मुक्ति प्राप्त होती है।

पौष पूर्णिमा के दिन शाकम्भरी जयन्ती भी मनायी जाती है। इस्कॉन के अनुयायियों तथा वैष्णव सम्प्रदाय द्वारा इस दिन पुष्याभिषेक यात्रा आरम्भ की जाती है। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले आदिवासी पौष पूर्णिमा को छेरता पर्व के रूप में मनाते हैं।

पौष पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, पौष पूर्णिमा पौष महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इस दिन चंद्रमा अपनी पूरी चमक और सुंदरता के साथ आकाश में मौजूद होते हैं, जिससे वातावरण में विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा भर जाती है। शास्त्रों के अनुसार, पौष पूर्णिमा पर स्नान, दान और तपस्या करने का फल कई गुना बढ़ जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गंगा, यमुना और नर्मदा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने से कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और मन शुद्ध होता है। जो भक्त तीर्थ यात्रा करके स्नान नहीं कर सकते, वे घर पर अपने नहाने के पानी में गंगाजल मिला सकते हैं।

Paush Purnima 2026: आज है साल की पहली पूर्णिमा, इस विधि से करें पूजा

पौष पूर्णिमा पूजा विधि

पौष पूर्णिमा हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। इस दिन दान, स्नान और पूजा का विशेष महत्व होता है। पौष पूर्णिमा की पूजा विधि इस प्रकार है:

पौष पूर्णिमा के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदी, सरोवर या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सूर्य देव को जल अर्पित करें। इसके बाद घर के मंदिर में दीपक जलाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। पूजा में अक्षत, फूल, धूप, दीप, फल और तुलसी दल अर्पित करें।

भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें और विष्णु सहस्रनाम या सत्यनारायण कथा का पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़ या कंबल का दान करना अत्यंत शुभ होता है। अंत में भगवान से सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्रार्थना करें।

पौष पूर्णिमा पर किया गया दान और पूजा अक्षय पुण्य प्रदान करती है।

यह भी पढ़ें: पौष पूर्णिमा स्नान के साथ ही शुरू हुआ माघ मेला 2026, श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

.

tlbr_img1 होम tlbr_img2 शॉर्ट्स tlbr_img3 वेब स्टोरीज tlbr_img4 वीडियो tlbr_img5 वेब सीरीज